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धवल केश (कविता)

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फूलने, फलने और निर्झर होने के बाद सरसो के सूखे सफेद डाँठ से रह गए यह धवल केश विन्यास कहते हैं लास्य,...

राह (कविता)

राह खुद चल के आएगी तू कदम बढ़ा के तो देख, मंजिल सामने होगी तेरे तू आँख उठा के तो देख। हाथ की...

कोविड में मंगल-गान (लघुकथा)

"जिज्जी! जीवन भर अपनी किस्मत को कोसते ही बीतेगी लगता है। लल्ला का ब्याह तय होते-होते हुआ भी तो...

मेरा प्रतिशोध (संस्मरण)

गणित विषय को पढ़ाते हुए जब गणना अर्थात काउंटिंग का कहीं कोई कार्य होता है तब ऐसे में मुझे...

पिता (कविता)

लूडो के खेल में कटते-पिटते, बचते-बचाते, हारते-हराते सर्वप्रथम होम में पुंगने वाली गोटी ही पिता है शतरंज के खेल में मरते-मारते, तिकड़म लगाते त्यागते-बटोरते सैनिक, हाथी,...

संवारो लेख जीवन का

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उठो ! हिम्मत से करो सामना ! यह समय नहीं है , विपदा से ध्वस्त, पस्त होकर यूँ शोक मनाने...

रिश्ता पुराना

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नज़र का ऊपर उठना, सितारों की महफिल में खो जाना‌ चांद की चांदनी निर्मलता पाना, सूर्य की तपिश में कंचन हो जाना, सदियों...

घात पीछे से करने लगे

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घात पीछे से करने लगे   बेरहम है यह दुनियाँ संभल कर चलो , घात पीछे से करने लगे हैं यहां | हर...

पिता …।

पिता...। क्या लिखूँ इस अनमोल शब्द के लिए, जो अपनी संतान के लिए हर सुख त्याग देते हैं। जो कठोर अनुशासन अपने बच्चों को...

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गीता (लघुकथा)

...अरे! गीता तु अभी तक तैयार नहीं हुई है। सुबह से, मैं कितनी बार बोल चुकी हूं, लेकिन तु है कि सुनती ही नहीं।...

मुझे माँ चाहिए!!!

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शिल्पा को ईश्वर ने हर खुशी से नवाजा था। बहुत प्यार करनेवाला पति, बंगला, गाड़ी और नौकर-चाकर सब कुछ! कमी थी तो सिर्फ़ एक बात...

वो बदल गया…..(सच्ची कहानी)

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ये कहानी बिल्कुल सच्ची है ।जिन बच्चोंं  के सिर से माता या पिता का साया उठ गया उनके जीवन में किस तरह बदलाव आया।यह...

हे प्रभु यह क्या कर दिया

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"आज फिर एक मौत हो गई, पड़ोस के गांव में एक युवती के महामारी के दौरान मृत्यु हो गई, सुना है वह तो अस्पताल...

“वंश चलाने की भूख”

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एक समय की बात है। हीरापुरा गांव में श्याम लाल का परिवार रहता था। इस परिवार को गांव के समृद्ध परिवारों में गिना जाता...

समानता

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महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मिसेज शर्मा के समानता वाले शानदार वक्तव्य ने सारे हॉल को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया,,,,, जैसे ही...

⎸ poems ⎹

रिश्ता पुराना

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नज़र का ऊपर उठना, सितारों की महफिल में खो जाना‌ चांद की चांदनी निर्मलता पाना, सूर्य की तपिश में कंचन हो जाना, सदियों से रहा होगा यहां आना-जाना आकाश...

घात पीछे से करने लगे

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घात पीछे से करने लगे   बेरहम है यह दुनियाँ संभल कर चलो , घात पीछे से करने लगे हैं यहां | हर कदम पर है धोखा संभल...

पिता …।

पिता...। क्या लिखूँ इस अनमोल शब्द के लिए, जो अपनी संतान के लिए हर सुख त्याग देते हैं। जो कठोर अनुशासन अपने बच्चों को सिखाकर अपने दिल में उनके लिए प्यार...

“पापा मेरे, मेरे आदर्श”

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पापा मेरे, मेरे आदर्श आप ही मेरे जीवन के, पथ प्रदर्शक। आपके ही कदमों के निशां  पर चलकर जीता मैंने जीवन का हर संघर्ष। अनुभव आपका, अनमोल है...

कब तलक चलते रहोगे

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कब तलक चलते रहोगे, इन गुमनाम गलियों मे, न सहारा मिलेगा, इन राहों में, जीवन के फलसफों को, रखना साथ हमेशा, गुमनामी के अंधेरे को न बताना, किसी से। कब तलक चलते...

मेरे पापा जी

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वो धूप मे वो ही है छांव में, वो शहर में भी वो गांव में संग होते हैं सदा मेरे, तो जीत जाती हूँ मै...

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प्रोफ डॉ दिनेश गुप्ता ने बनाया फिर एक नया...

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प्रोफ. डॉ दिनेश गुप्ता- आनंदश्री ने प्रस्थापित किया फिर एक नया कीर्तिमान - दुनिया के सभी पिता को किया समर्पित - इसके पहले भी उन्होंने लिम्का...

मेरा गांव या मेरा शहर

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'गाँव में भारत की *आत्मा* बसती है' सही कहा है गांधी जी ने। *मेरा गाँव या मेरा शहर*, दोनों के अपने अपने तर्क हैं। जीविका...

बौद्ध की शिक्षाओं का जीवन में महत्व

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"हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर है, आप खुद को जीत लें, फिर वह जीत आपकी अपनी होगी। जिसे आप से कोई नहीं छीन सकता।" भगवान...

कितने शुभ होते हैं शुभ मुहूर्त?

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क्या आपको पूर्ण विश्वास हैं कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य हमेशा शुभ ही होते हैं? शुभ मुहूर्त में शुरु किए गए कार्यों...

ख़ुद को ख़ुद से मांग कर तो देखिये.

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समय है कि थमता ही नहीं और ज़िन्दगी चली जा रही है। दिन और रात हर रोज़ नये हो जाते हैं और हम वहीं...

वर्क फ्रॉम होम संकृति को स्वीकार करें

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  वर्क फ्रॉम होम सभ्यता को स्वीकार करें- आनंदश्री - आने वाले बहुत से जॉब ओपनिंग वर्क फ्रॉम होम के ही होंगे कहते है दफ्तर दफ्तर होता...

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चले आओ…

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फिर चाहूँ बस ये ही तुमसे आखों में चले आओ नीन्द में जब हो आंखे बंद तो ख्वाबों में चले आओ जब भी मुझसे दूर हो मेरी बातों मे...

देखो फिर वो शाम आयी…

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दिल को फिर से याद आयी देखो फिर वो शाम आयी महफ़िल में फिर तन्हाई देखो फिर वो शाम आयी दिल कैसा है मुश्किल में कि क्या कहें और...

मेरे अल्फाज : कुमार किशन कीर्ति

1ऐ दिल खामोश रह अपने प्यार के लिए। एक दिन वो तड़प कर आएगी, तुझे पाने के लिए। 2यूँ ही नहीं मिलती मंजिल किसी को बहुत कुछ खोना...

मेरी शायरी

दिल चाहता है कुछ ऐसा लिखूँ सारे जख्म भर जाए। तुम्हें पा ना सका तो क्या हुआ ? बस...तुम्हारे ही प्यार में हम मिट जाए। 2जानते ना थे.... इश्क में इतने...

मेरी शायरी

1दिल चाहता है कुछ ऐसा लिखूँ सारे जख्म भर जाए। तुम्हें पा ना सका तो क्या हुआ ? बस...तुम्हारे ही प्यार में हम मिट जाए। 2जानते ना थे.... इश्क में इतने...

मेरे अल्फाज

अगर इश्क हादसा है तो इससे गुजरने दो। दो दिलों को इसमें घायल होने दो। अधूरा है चांद, अधूरी है रातें। अधूरे हैं हम या अधूरी है...

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कोरोना में ग्राहक सेवा का मूलमंत्र

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कोरोना में ग्राहक सेवा का मूलमंत्र -आनंदश्री - जब सब कुछ बदल रहा है तो ग्राहक सेवा की कार्यप्रणाली भी बदलनी होगी पांच महत्वपूर्ण स्तर पर...

चले आओ…

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फिर चाहूँ बस ये ही तुमसे आखों में चले आओ नीन्द में जब हो आंखे बंद तो ख्वाबों में चले आओ जब भी मुझसे दूर हो मेरी बातों मे...

देखो फिर वो शाम आयी…

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दिल को फिर से याद आयी देखो फिर वो शाम आयी महफ़िल में फिर तन्हाई देखो फिर वो शाम आयी दिल कैसा है मुश्किल में कि क्या कहें और...

मेरे अल्फाज : कुमार किशन कीर्ति

1ऐ दिल खामोश रह अपने प्यार के लिए। एक दिन वो तड़प कर आएगी, तुझे पाने के लिए। 2यूँ ही नहीं मिलती मंजिल किसी को बहुत कुछ खोना...

लगन

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अभी सपना था,तेरा साथ था, सहारा था, मेरे पहलू में ये जमीं आसमान सारा था। जिरह तो थी मगर बात कुछ अलग ही थी, तेरी खुशी थी...

सर्वोत्तम व्यवहार

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जिस ह्रदय बसे सुन्दर व्यवहार मित्रवत जीवन जिसका आधार श्रेष्ठ,शुभ कर्मों का बढ़ाता हो आकार मीठी वाणी हो मुख संचार प्रवाहित होती रहे पल-पल तिस जीवन खुशियों की बहार। संतुष्टता...