ना जाने कौन सी खिड़की खुली थी (एक दुखांतक संस्मरण / लघुकथा)

अमूमन सुबह थोडी जल्दी नींद खुल जाती है पर उस दिन छुट्टी थी इसलिये सुबह थोडी देर से सोकर उठे। बालकनी मे आये तो देखा आसमान मे काले बादल छाये…

बलात्कार

एक ना भरने वाला घाव है ये है बन गया समाज का नासूर जो है। नारी तन की अस्मिता को धूल धूसरित करता ये ऐसा घाव है। कभी निर्भया तो…

रिश्वत

हमार देशमा सरकारी कार्यालय मा बैठन वाल अधिकारी बाबू बहुत अच्छे और ईमानदारी पुर्वक कार्य करन वाल है। हम काहे उनकी बुराई करे। हम तो बस उनके गुण बयां कर…

अगर आप ईमानदार है तो…

क्या आप ईमानदार है? क्या आप अच्छी साख रखते है फिर भी उसका उपयोग नही करते? फिर तो आप हमारे देश के सरकारी विभागो मे कार्यरत अधिकारियो और कर्मचारियो की…

वसुंधरा बनाओ – आनंदश्री

एक पेड़ और लगाओ… पेड़ लगाओ, भर पुर उगाओ इस धरती को, वसुंधरा बनाओ एक पेड़ और लगाओ…। ऊपर नीला, आसमान है इस धरती को, हरा बनाओ एक पेड़ और…

सिंहासन बत्तीसी : पहली पुतली रत्नमंजरी की कहानी

अंबावती में एक राजा राज करता था। उसका बड़ा रौब-दाब था। वह बड़ा दानी था। उसी राज्य में धर्मसेन नाम का एक और बड़ा राजा हुआ। उसकी चार रानियां थी।…

धवल केश (कविता)

फूलने, फलने और निर्झर होने के बाद सरसो के सूखे सफेद डाँठ से रह गए यह धवल केश विन्यास कहते हैं लास्य, लिप्सा, लालिमा ने उन्हें पवित्रता की कंदरा में…

विरह आग तन में लगी, जरन लगे सब गात, नारी छूवत वैद्य के, परे फफोला हाथ

मीरा कहती हैं- ‘दरद की मारी बन-बन डोलूं, वैद मिला नहिं कोय।’ जगह-जगह जाती हूं। जहां भी जाती हूं, वहीं गोविन्द की याद हो आती है। फूल खिलता है तो…

प्रेम करने से पहले प्रेम को पढ़िए भी

  "कौन सा गुनाह ? कैसा गुनाह ? किसी से जिंदगी भर स्नेह रखने, प्रेम करने का गुनाह... स्नेह और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचने लगे तो उसका त्याग…

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