धवल केश (कविता)

फूलने, फलने और निर्झर होने के बाद सरसो के सूखे सफेद डाँठ से रह गए यह धवल केश विन्यास कहते हैं लास्य, लिप्सा, लालिमा ने उन्हें पवित्रता की कंदरा में…

विरह आग तन में लगी, जरन लगे सब गात, नारी छूवत वैद्य के, परे फफोला हाथ

मीरा कहती हैं- ‘दरद की मारी बन-बन डोलूं, वैद मिला नहिं कोय।’ जगह-जगह जाती हूं। जहां भी जाती हूं, वहीं गोविन्द की याद हो आती है। फूल खिलता है तो…

प्रेम करने से पहले प्रेम को पढ़िए भी

  "कौन सा गुनाह ? कैसा गुनाह ? किसी से जिंदगी भर स्नेह रखने, प्रेम करने का गुनाह... स्नेह और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचने लगे तो उसका त्याग…

सुशांत, आखिर क्यों, सुशांत!

आत्महत्या निस्संदेह में एक जघन्य पाप है। एक आदमी जो खुद को मारता है, उसे इस दुनिया में बार-बार लौटना होगा और उसकी पीड़ा भुगतनी होगी। — श्री रामकृष्ण परमहंस…

वन्यजीवो की कठोर होती ज़िंदगी

भारत दुनिया के शीर्ष 17 मेगा-विविध देशों में से है। यह शेर, बाघ, तेंदुए और भूरे भालू जैसे बड़े शिकारियों से लेकर हाथियों और गैंडों जैसे बड़े शिकारियों तक, दुनिया…

इक ज़िंदगी और जिएँ

वैकल्पिक सोच के इस युग में, एक महत्वपूर्ण लड़ाई है जिसे हम सभी को लड़ना चाहिए - सेवानिवृत्ति के विचार के खिलाफ। एक समाज के रूप में, भारतीयों - आम…

विद्यालयी शिक्षा में प्रधानाचार्य के प्रबन्धन कौशलों का योगदान

भारत में आदिकाल से ही 'ज्ञान' की महत्ता को स्वीकार किया गया है एवं शिक्षा की सतत् प्रक्रिया हेतु प्रयास होते रहे हैं। शिक्षा वह प्रकाश है, जिसके द्वारा मानव…

हिंदी सिनेमा के शुरूआती दौर | आनंद दास

सिनेमा आधुनिक युग की सर्वाधिक लोकप्रिय कला है। सिनेमा विज्ञान की अद्‌भुत देन है। सिनेमा का प्रयोग दैनिक जीवन में मनोरंजन के रूप में किया जाता है। सिनेमा का हमारे…

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