आत्ममहत्या: विकल्प और भी है!!

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दोस्तों, आज मैं उन लोगों से बात करना चाहती हूं, जिनके दिल में आत्महत्या (suicide) करने का ख्याल बार-बार आता है। जो सोचते है कि इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है…मैं किसके लिए जिऊं?…शायद आप सोच रहे होंगे कि आज मैं ये कौन से फालतु विषय पर बात कर रही हूं? दोस्तों, आत्महत्या फालतू विषय नहीं है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते है। हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर अपनी जान देता है। जब दुनिया में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा हो, तो आत्महत्या विषय फालतू नहीं हो सकता!

जिंदगी से निराश होकर ही कोई भी इंसान आत्महत्या करने की सोचता है। लेकिन सोचिए, सोच-सोच कर सोचिए…क्या आत्महत्या करने के बाद सब समस्याएं हल हो जाएगी? नहीं बिल्कुल नहीं। वास्तव में समस्या तो वैसी ही रहती है! सिर्फ़ समस्या का समाधान करने के लिए हम नहीं रहते!!

जब हमें यह जीवन ईश्वर ने दिया है, तो इस जीवन को खत्म करने का अधिकार भी ईश्वर को ही है। धर्म के अनुसार कई योनियों के बाद मानव जन्म मिलता है। ऐसे अनमोल मानव जीवन को खत्म करना महामुर्खता है! यदि कीड़े-मकोड़ों की तरह पैदा हुए और मर गए, तो मनुष्य होने का औचित्य ही क्या है?

आप आत्महत्या क्यों करना चाहते हो? शायद आप जैसा चाहते है, जिंदगी वैसी नहीं चल रही है। हो सकता है कि आपकी इच्छाएं पूरी न हुई हो! यदि ऐसा है, तो अपनी इच्छाओं को खत्म करो! जिंदगी को क्यों खत्म करते हो? इच्छाएं पूरी न होने से जब इंसान ज्यादा तनाव महसूस करता है, तो उसके सामने दो ही रास्ते होते है। एक- जिसके कारण तनाव है, उस को मारो या खुद को मारो! किसी और को मारना खतरनाक है इसलिए लोग खुद को मारने की सोचते है। लेकिन ये भी तो एक हत्या ही है। इसलिए क्यों न खुद को मारने की बजाये हम खुद को बदल दे!!

आत्महत्या ब्रम्ह हत्या से भी बड़ा पाप है! 
वास्तव में आत्महत्या शब्द ही गलत है क्योंकि आत्मा अमर है। हत्या होती है शरीर की। इसलिए इसे देहहत्या कह सकते है। दूसरे की हत्या से ब्रम्ह हत्या का पाप लगता है लेकिन खुद के ही देह की हत्या करने से ब्रम्ह हत्या से भी ज्यादा पाप लगता है! जिस देह के सहारे आप इतने वर्षों तक इस संसार में रहे…जिस देह ने आपको संसार को देखने, सुनने और समझने की शक्ति दी…जिस देह के माध्यम से आपने अपनी हर इच्छाओं की पुर्ति की…उस देह ने आपका क्या बिगाड़ा, जो आप उसकी हत्या कर रहे हो?

आत्महत्या के बाद का जीवन ज्यादा कष्टकारी होता है!
हर इंसान की सबसे बड़ी ख्वाहिश रहती है कि उसे मुक्ति मिले। लेकिन वेद और पुराणों के अनुसार आत्महत्या करने वाले व्यक्ति की आत्मा हमारे बीच ही भटकती रहती है, उसे न ही स्वर्ग/नर्क मिलता है और न ही उसे नया जीवन मिलता है। ऐसी आत्मा को तब तक ठिकाना नहीं मिलता जब तक उनका समय चक्र पूरा नहीं हो जाता। इसलिए आत्महत्या के बाद का जीवन फिलहाल के जीवन से भी ज्यादा कष्टकारी हो सकता है…इस बारे में जरूर सोचिए।

ये सभी बातें आत्महत्या करने वाले ज्यादातर लोगों को पता होती है। इसके बावजूद लोग आत्महत्या क्यों करते है? आइए, जानते है कुछ कारण जिनकी वजह से लोग आत्महत्या जैसा निंदनीय कृत्य करते है‌‌-

मेरा कोई नहीं है… 
हर इंसान को अपने सुख-दुख को बांटने के लिए किसी व्यक्ति की आवश्यकता होती है। हर इंसान एक ऐसा कंधा तलाशता है, जिस पर सर रख कर वो रो सके! कोई तो हो जो उसे समझे…जो उसके सुख-दु:ख में उसके साथ खड़ा हो…एक ऐसा साथ, जिसके साथ चलने पर हर यात्रा छोटी लगे! जिंदगी की हर वो खुशी खोखली महसूस होती है, यदि वो खुशी इंसान किसी के साथ सेलिब्रेट न कर पाएं। इंसान को हर वो हंसी फ़ीकी लगती है, जो हंसी किसी के साथ मिल कर ठहाकों में तब्दील न हो जाएं! हर इंसान को फिल्म ”मुन्नाभाई एमबीबीएस” की तर्ज पर एक जादू की झप्पी की तलाश रहती है। जब ये जादू की झप्पी नहीं मिलती…जब इंसान को लगता है कि मेरा कोई नहीं है…तब निराश होकर वो आत्महत्या करता है।

मैं कहती हूं कि माना कि आपको किसी ने जादू की झप्पी नहीं दी…माना कि आपका कोई नहीं है…लेकिन आप तो किसी को जादू की झप्पी दे सकते हो…आप तो किसी के हो सकते हो…आप तो किसी को अपना मान उसे कह सकते हो कि ”मैं हूं ना!!” एक बार किसी को अपना बना कर देखिए…एक बार किसी की खुशी बन कर देखिए…यकीन मानिए कि इतना सुकून मिलेगा कि आपकी जिंदगी ही खुशनुमा हो जाएगी! और जिंदगी खुशनुमा होने पर तो आप खुद ज्यादा जीना चाहोगे!!

• गरीबी से तंग आकर 
बिल गेट्स ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ”आप गरीब माता-पिता के घर में जन्म लेते हो तो इसमें आपका कोई भी दोष नहीं है। लेकिन आप आजीवन उस गरीबी का रोना रोते हुए, बिना संघर्ष किए धन-संपत्ति अर्जित किए बिना ही मर जाते हो, तो आप वास्तव में पाप के भागी हो!”

वास्तव में कमाने वाले लोग रद्दी बेच कर और रद्दी खरीदकर भी करोड़पति हो जाते है। “मुझे धंधे में सफलता ही नहीं मिलती, मेरा भाग्य ही खराब है” ऐसा कहने की बजाए ये सोचिए कि क्या कारण है कि मुझे धंधे में सफलता नहीं मिलती? उन कारणों को जानकर उन्हें सुधारने की कोशिश करें, अपने स्वभाव में बदल कीजिए। यकीनन आपकी गरीबी दूर होगी।

असाध्य बीमारी से तंग आकर- 
यदि तन में रोग आ जाएं तब भी मन को मजबूत रखिए। मन की मजबुती में ही रोगों से लड़ने की ताकत होती है। ऑस्ट्रेलिया के निक युजिकिक बिना हाथ-पैरों के पैदा हुए थे। अब वे मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में 50 से ज्यादा देशों में स्पीच दे रहे है! जब तक आप मन से नहीं हारते है, तब तक बीमारी से लड़ने की ताकत कायम रहती है।

मैं किसके लिए जिऊं? 
मैं किसके लिए जिऊं? मेरे जीवन का कोई मकसद ही नहीं है! ऐसा कहना पूरी तरह गलत है। प्रकृति ने आपको बनाया, तो उसके पीछे उसका कोई न कोई मकसद जरुर होगा। प्रकृति कोई भी चीज बिना वजह नहीं बनाती। ईश्वर ने आपको इस धरती पर भेजा है, तो ईश्वर को आपके माध्यम से कोई न कोई कार्य जरुर करवाना होगा। अत: मन में किसी भी तरह की निराशा न पालते हुए आप में जो भी हुनर है, उस हुनर के लिए अपने आप को समर्पित कर दो। जब-जब आपके हाथों से कोई अच्छा कार्य होगा, तब-तब आपको खुशी मिलेगी और आपको जीने के लिए एक मकसद मिल जाएगा। लेकिन ध्यान रखिए ये मकसद आपके लिए कोई नहीं ढूंढेगा, मकसद आपको खुद को ही ढूंढना होगा!

• किसी ने मेरा दिल तोड़ दिया- 
यदि किसी ने आपका दिल तोड़ दिया…आपके साथ बेवफाई की…जिससे आपके दिल पर जख्म है…बहुत गहरे जख्म है…लेकिन याद रखिए कि वक्त के साथ जख्म भर जायेंगे! जब नन्हें बच्चे का खिलौना टूट जाता है, तो वह रो रोकर शोर मचाता है। लेकिन जब हम उसके हाथ में नया खिलौना देते है, तो वह खिलखिला कर हंसने लगता है। आप भी अपने लिए नया जीवनसाथी ढूंढे। सबसे बड़ी बात कि यदि कोई आपसे प्यार नहीं करता तो कोई बात नहीं, आप खुद अपने आप से प्यार करे!!
इस तरह किसी भी हालात में आत्महत्या के विचार को अपने पास भी भटकने न दे। अंत में सिर्फ़ इतना ही कहना चाहती हूं,

क्यों मरे उनके लिए, जो नहीं बने हमारे लिए…
जियेंगे उनके लिए, जो जीते है हमारे लिए!!
यदि हमारे लिए जीने वाला भी न मिले…
तो जियेंगे खुद के लिए!!!

निवेदन- 
शोध बताते है कि आत्महत्या पर थोड़ा अंकुश लगाना संभव है। क्योंकि बहुत कम लोग सोच समझ कर और प्लानिंग के साथ आत्महत्या करते है। ज्यादातर लोग क्षणिक आवेग में, क्षणिक निराशा में, गुस्से से वशीभूत होकर ही आत्महत्या करते है। यदि उस एक क्षण में आत्महत्या करनेवाले व्यक्ति को किसी का सहारा मिल जाए…वो एक क्षण टल जाएं तो आत्महत्या करने वालों का प्रतिशत कम हो सकता है। क्या हम व्यक्तिश: किसी का सहारा बन कर उसे आत्महत्या करने से रोक सकते है? हम कोशिश तो कर ही सकते है न!!

मैं तुमसर, महाराष्ट्र की रहनेवाली हूं। मैं खुशियां बांटना चाहती हूं...चाहे वह छोटी-छोटी ही क्यों न हो! मैं ने 'आपकी सहेली' नाम से एक ब्लॉग (https://www.jyotidehliwal.com) बनाया है। मैं इस ब्लॉग के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधश्रद्धा दूर करने का, समाज में जागरुकता फैलाने का, किचन टिप्स और रेसिपीज के माध्यम से इंसान का जीवन सरल बनाने के कार्य में लगी हू। • विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कहानियां प्रकाशित। • IBlogger ने मुझे Blogger of the year 2019 चुना था।

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