क्या लिव इन रिलेशनशिप सही है?

2
28

आजकल के युवाओं में वैवाहिक रिश्ते की वैकल्पिक व्यवस्था लिव इन रिलेशनशिप का मोह बढ़ता जा रहा हैं। उनका कहना हैं कि इससे साथी को समझने परखने में आसानी होती हैं, वे पूरी जिंदगी का जुआ खेलना नहीं चाहते और यदि दोनों के आचार विचार मिले तो ही शादी करने में भलाई हैं। लेकिन वे लोग लिव इन की भयावहता से अनजान हैं। कई युवाओं को ये पता ही नहीं हैं कि लिव इन में भी जबाबदारी होती हैं!

लिव इन रिलेशनशिप का मतलब

जब बालिग लड़का और लड़की अपनी मर्ज़ी से विवाह के बंधन में बंधे बिना घर की एक ही छत के निचे पति-पत्नी की तरह रहते हैं तो उस संबंध को लिव इन रिलेशन कहते हैं। लिव इन भावनात्मक बंधन के आधार पर साथ रहने का व्यक्तिगत एवं आर्थिक प्रबंध मात्र हैं। इस में हमेशा के लिए साथ देने का कोई वादा नहीं होता। लिव इन में रहने का फैसला कितना सही होगा या कितना गलत होगा ये तो कोई नहीं बता सकता। किसी भी रिश्ते को लंबे समय तक टिकाने के लिए उसके नियम-कानून और कुछ व्यवहारिक बातों को जानना जरूरी हैं। इस विषय पर बनी फिल्म “लव के फंडे” बनने से पहले यशराज प्रोडक्शन ने मैक्स मीडिया के साथ मिल कर एक सर्वे कराया था। जिस में 68% युवाओं का मानना था कि लिव इन प्यार नहीं वासना हैं। 72% लोगों ने माना कि इस का अंत ब्रेक अप होता हैं।

लिव इन रिलेशनशिप पर कानून क्या कहता हैं?

लिव इन में रहने के लिए भी उच्चतम न्यायालय की कुछ शर्तें हैं जैसे कि

• दोनों बालिग हो

• दोनों ही अविवाहित या तलाक़शुदा हो

• एक समय में एक ही रिलेशनशिप में रहना जरूरी हैं।

• किसी से विवाह के बाद संबंध बनाए तो यह लिव-इन रिलेशनशिप नहीं हैं।

• यदि पति की मौत हो जाती हैं, तो महिला संपत्ति में हिस्सेदारी मांग सकती हैं। कोई भी पुरुष या महिला लिव इन को खेल न समझे इसलिए कानून बनाए गए हैं। ताकि कोई पुरुष केवल सेक्स संबंध के लिए किसी लड़की के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद छोड़ ना सके। अगर वह छोड़ता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लिव इन में रहने वाली महिलाओं के पास वो सारे कानूनी अधिकार हैं, जो भारतीय पत्नी को संवैधानिक तौर पर दिए गए हैं।

• घरेलू हिंसा से संरक्षण प्राप्त

• प्रॉपर्टी पर अधिकार

• संबंध विच्छेद की स्थिति में गुजारा भत्ता

• बच्चे को विरासत का अधिकार मतलब यह कि लिव इन रिलेशन में रह रहे पुरुष को भी पति की तरह सारी ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती हैं। साथ ही यदि वह बगैर धोखा दिए यानी आपसी सहमति से भी रिश्ता तोड़ते हैं तो भी कोर्ट के फैसले के आधार पर जुर्माना लग सकता हैं। उन्हें साथी महिला को गुजारा भत्ता देना पड़ सकता हैं और यदि इस रिश्ते से बच्चा पैदा हुआ हैं तो उसका संपत्ति पर अधिकार भी होता हैं। ज्यादातर युवाओं को ये कानून पता नहीं हैं। इसलिए वे सोचते हैं कि लिव इन में सिर्फ मौज़ मस्ती हैं और जिम्मेदारियां कुछ नहीं हैं। यहीं सोचकर उनका रुझान इस ओर बढ़ रहा हैं। लेकिन वास्तविकता यहीं हैं कि दूर के ढोल सुहाने लगते हैं!

लिव इन के प्रमुख लाभ

• शादी से पहले ही साथी का साथ मिलने से साथी को जानने में आसानी होती हैं। • इस रिश्ते में सामाजिक एवं पारिवारिक नियम लागू नहीं होते। • वैवाहिक जीवन की जबाबदारी नहीं होती।

• संबंध समाप्त होने पर तलाक जैसे झंझट से झुटकारा मिलता हैं। ये लाभ युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। लेकिन लाभ की तुलना में लिव इन के नुकसान ज्यादा हैं।

लिव इन के नुकसान

• साथी से वफ़ा चाहिए तो लिव इन सही नहीं हैं

वर्तमान लिव इन रिश्तों का भावी वैवाहिक रिश्तों पर भी गहरा असर होता हैं। एक अध्ययन के मुताबिक यदि कोई शख्स शादी से पहले सेक्स का अनुभव करता हैं, तो इस बात की संभावना ज्यादा रहती हैं कि शादी के बाद भी उस के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स रहेंगे। अध्ययनों के मुताबिक जो पुरुष एवं महिलाएं शादी से पूर्व लिव इन में नहीं रहे उनमें से 90% पुरुष और महिलाएं अपने साथी के प्रति वफादार रहे। जबकि शादी से पूर्व लिव इन में रह रहे सिर्फ 60% महिलाएं और 43% पुरुष ही अपने साथी के प्रति वफादार रहे। ये आंकड़े बताते हैं कि यदि आप चाहते है कि आपका लाइफ पार्टनर आपके प्रति वफादार रहे तो लिव इन में न रहे। लिव इन का महिलाओं पर गलत असर होता हैं हमारा समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाएं इस के मापदंड हमेशा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग रहे हैं। समाज ऐसी महिलाओं को इज़्ज़त की नज़रों से नहीं देखता। कभी-कभी तो लिव इन के तनाव के कारण और गर्भ धारण होने की स्थिति में कई महिलाएं आत्महत्या तक कर लेती हैं। टीवी स्टार प्रत्यूषा बनर्जी (बालिका वधु की आनंदी) अपने ब्वॉयफ़्रेंड राहुल राज के साथ लिव इन में रह रहीं थी। वो प्रेग्नेंट थी और राज से शादी करना चाहती थी। लेकिन शायद राहुल इसके लिए तैयार नहीं था। इस मानसिक तनाव से ग्रस्त प्रत्यूषा बनर्जी अपने घर में फाँसी के फंदे पर लटकी पाई गई।

• कई मामलों में लड़के लड़कियों का अश्लील वीडियो बना लेते हैं। बाद में अलग होने पर यहीं वीडियो लड़कियों की जिंदगी नर्क बना देते हैं। शादी के बाद लड़कियाँ हमेशा इस डर के साथ जीती हैं कि कहीं ये वीडियो ससुराल वालों के हाथ न लग जाए या सोशल मीडिया पर अपलोड न हो!

• जो लड़कियाँ ऐसे रिश्ते से गर्भवती हो जाती हैं उनको आज भी हमारा समाज स्वीकार नहीं करता। कई बार तो लड़के ख़ुद ऐसी लड़कियों से किनारा कर लेते हैं। उनका कहना होता हैं कि जो लड़की शादी से पहले किसी के साथ सो सकती हैं वो शादी के बाद भी…इतना ही नहीं कुछ लड़के तो साफ़-साफ शब्दों में यहां तक कह देते हैं कि वो बच्चा उनका हैं ही नहीं! ऐसे में लड़की न घर की रहती हैं न घाट की!! इसलिए खासकर लड़कियों को लिव इन रहने से पहले सौ बार सोचना चाहिए। इम्यून सिस्टम कमजोर होता हैं लिव इन में लिव आउट का विकल्प हमेशा खुला रहने से असुरक्षा और अनिश्चिंत भविष्य की चिंता हमेशा लगी रहती हैं। जिससे ऐसे लोग अवसाद और भावनात्मक उथल पुथल के शिकार होते हैं। थोड़ी उम्र बीतने के बाद हर इंसान अपने जीवन मे स्थिरता चाहता हैं। लेकिन लिव इन में रहने वाले हमेशा इस दुविधा में रहते हैं कि परिवार बढ़ाएं या न बढ़ाएं…इस दुविधा के कारण उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने से इन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता हैं।

अपराधबोध से उपजी बेचैनी

ज्यादातर मामलों में लिव इन में रह रहे लड़के-लड़कियों को माँ-बाप की सहमति न मिलने से उन्हें इस रिश्ते का राज छिपा कर रखना पड़ता हैं। इस विषय पर हाल ही में बनी फिल्म “लुका-छुपी” में यह बात बहुत अच्छी तरह बताई गई हैं कि लिव इन में रह रहे नायक-नायिका को अपने संबंधों को छिपाने के लिए कितने और कैसे-कैसे पापड़ बेलने पड़ते हैं। उन लोगों को अपने माँ-बाप से लगातार झूठ बोलने का अपराधबोध कितना सताता हैं और इससे वे कितने ज्यादा बेचैन हो जाते हैं। लड़कियों के लिए तो यह भयावह हैं ही लेकिन लड़कों के लिए भी कम भयावह नहीं हैं। क्योंकि कई बार लड़कियाँ भी लिव इन में रहने के बाद लड़कों पर रेप का केस दर्ज कर देती हैं। लिव इन का रिश्ता ऊपर से लुभावना नजर आता हैं, पर अंदर से वो बहुत ज्यादा खोखला हैं। लड़कों के लिए नुकसानदायक इसलिए हैं क्योंकि सहमति से अलग होने पर भी न्यायालय लड़के पर जुर्माना लगा सकती हैं और लड़की रेप का केस कर सकती हैं! लड़कियों के लिए इसलिए नुकसानदायक हैं कि समाज के ताने सुनने पड़ेंगे और लड़का अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर सकता हैं!! इसलिए इस लेख के माध्यम से मैं आज के युवाओं को यहीं कहना चाहती हूं कि लिव इन में रहने से पहले इसके सभी पहलुओं पर गौर अवश्य करें।

मैं तुमसर, महाराष्ट्र की रहनेवाली हूं। मैं खुशियां बांटना चाहती हूं...चाहे वह छोटी-छोटी ही क्यों न हो! मैं ने 'आपकी सहेली' नाम से एक ब्लॉग (https://www.jyotidehliwal.com) बनाया है। मैं इस ब्लॉग के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधश्रद्धा दूर करने का, समाज में जागरुकता फैलाने का, किचन टिप्स और रेसिपीज के माध्यम से इंसान का जीवन सरल बनाने के कार्य में लगी हू। • विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कहानियां प्रकाशित। • IBlogger ने मुझे Blogger of the year 2019 चुना था।

2 COMMENTS

  1. युवक युवतियों को सही संदेश देनेवाला लेख ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here