जीवन

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मनुष्य का निर्माण प्रकृति से ही होता है प्रकृति से ही संसार कि सभी प्रकार के जीव जंतुओं का जीवन चक्र चलता है एक तरह से जीवन का निर्माण प्रकृति ही करता है एक तरह से सोचिए तो हमारे तीन ईश्वर होते हैं पहला वो जो हमें जन्म देते हैं हमारा पालन पोषण करते हैं दूसरा ये प्रकृति है जो हमें जीवन की जरूरतों की पूर्ति भोजन की आपूर्ति प्रकृति ही करता है तीसरा भगवान हमारे अंदर ही निहित है जो हमें सही मार्ग बताता है जीवन में हमारे लिए क्या अच्छा है क्या बुरा है इसका आभास हमारे हृदय में निहित वो खुदा करता है वो हमारे भीतर प्रेम,सद्भाव,उपकार,दया,धर्म,लोगों की भला करना आभास कराता है दिमाग भगवान हमें इसलिए देता है हर मुश्किलों से सोच समझकर आगे बढ़ना किसी को बिना नुकसान पहुंचाए अपना भी भला करना और औरों कि भी भला करना।यही धर्म का परिचायक है।यही धर्म होता है।भगवान होता है लेकिन वो हमारे में हृदय में निहित है वो सदैव सभी जीवों में समाहित है।

prachi

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