प्रकृति की परिवर्तनशीलता

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इस नश्वरवादी जगत में प्रकृति की परिवर्तनशीलता के आगे हम शुन्य मात्र है, इसलिए जो हमारे सामने आज विद्यमान है, वोकल हो सकता है या फिर नहीं भी किंतु उसे निश्चित अवधि के उपरांत इस भौतिकवादी सृष्टि को छोड़कर जाना ही पड़ता है।

क्योंकि परिवर्तन प्रकृति का नियम है, यह एक शाश्वत घटना है, जो अनंत काल से चली आ रही है एवं अनंत काल तक अनवरत चलती रहेगी। जो सिखाती है हमें, आज तेरा है, कल किसी और का होगा, अतः अपने मन की अंतशक्ति अंतकरण की शक्ति से लोभ, मद एवं माया आदि को स्वच्छदं मन से इन्हें पृथ्वी की घूर्णन शक्ति की तरह तुम भी अपने मन से इन जंजालों (माया रूपी प्रपंच) का ध्यान करो, और इन पर विजय प्राप्ति के लिए ध्यान मग्न हो जाओ ्, स्वत: ही तुम्हारे संपूर्ण दुख, दर्द समाप्त हो जाएंगे।।

मेरी कलम से

prachi

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