प्रबन्धन के अभाव में अव्यवस्था

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प्रबन्धन के अभाव में अव्यवस्था

डा. दलीप सिंह बिष्ट

असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग

देश में जितना संसाधनों के अभाव का रोना-रोया जाता है वास्तव उतना है नही, बल्कि प्रबन्धकीय कमी और लापरवाही के कारण यह अव्यवस्था हो जाती है। इसके लिए हमारी लचर व्यवस्था एव हम स्वयं जिम्मेदार है जिसके कारण यह समस्या कई गुना बढ जाती है। इसमें जल, विद्युत, चिकित्सकीय, खाद्य आदि विभिन्न समस्याओं को लिया जा सकता है, जो कि प्रबन्धकीय कमी के कारण विकराल रूप धारण कर लेती है। यही नही जब भी देश के अन्दर कोई भी आपदा आती है और लोग विभिन्न वस्तुओं के लिए परेशान रहते है उस समय कालाबाजारी, मुनाफाखोरी अपने चरमसीमा पर पहुंच जाती है और हमारी व्यवस्था तमाशबीन होकर देखती रहती है। इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है फिर भी अपराधी पहले तो पकड़े नही जाते है और पकड़े भी गये तो आसानी छूट भी जाते है यही नही जानते हुए भी कई वकील इनकी वकालात करने लगते है। 

    इसको कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है जैसे; प्रत्येक वर्ष अरबो टन खाद्यान्न गोदामों में बिना रख-रखाव के सड़ जाता है लेकिन वह गरीबों तक नही पहुंच पाता है। शादी या अन्य समारोहों में टनों भोजन यूं ही बरबाद किया जाता है परन्तु भूखों को वह भोजन देने के बजाय दुत्कार कर भगा दिया जाता है। इसके अलावा रही-सही कसर चोरबाजारी, जमाखोरी तथा भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी पूरा कर देते हैं। अब पानी की समस्या को ही ले लें नदी किनारे बसे लोग पानी के लिए तरस रहे है लेकिन अमीरों के जहां अपने लिए स्वीमिंग पुल है वहीं कुत्तों और घोड़ों के लिए पानी की अलग से व्यवस्था है। गरीबों को टैंकरों के माध्यम से जो गंदा पानी घंटों इंतजार के बाद दिया जाता है वह भी कुछ लोगों की कमाई का जरिया बन जाता है, जबकि प्रतिवर्ष जितना पैंसा टैंकरों से ढुलाई पर खर्ज किया जाता है उतने से कई वर्षो तक के लिए व्यवस्था बनाई जा सकती है। विद्युत व्यवस्था को लें विभाग खुलकर विद्युत का उपयोग करते हैं जबकि आम आदमी जो बड़े-बड़े बिल भुगतान करता है कई-कई दिनों तक अंधेरे में रहने के लिए मजबूर है। कई स्थानों तार झूलते है तो कई जगह खम्बे टूटे पड़े है जो कि कई बार लोगों की जान जोखिम में डाल देते हैं।

    वर्तमान समय में कोरोना को लेकर जिस प्रकार मानव जीवन संकट में है उसमें आॅक्सीजन सलेन्डर से लेकर दवाईयों तक की जमाखोरी, कालाबाजारी एवं मुनाफाखोरी अपनी चरम पर देखने मिल रही है। यहां तक की चिताओं को जलाने के लिए भी बसूली की घटनायें मानवता को तार-तार कर रही है और इसके लिए हमारी खत्म होती नैतिकता और शासन की लचर प्रबन्धकीय व्यवस्था पूरी तरह जिम्मेदार है। यदि हमारी वितरण प्रणाली को एक सुदृढ प्रबन्धकीय व्यवस्था के आधार पर चलाया जाय तो देश के अन्दर किसी भी चीज की कमी नही है और देश हर चीज के लिए सक्षम भी है।

हे0 नं0 बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से एम0 एस0 सी0 (भूगोल), एम0 ए0 (राजनीति विज्ञान), बी0 एड0 की शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रो0 (श्रीमती) अन्नपूर्णा नौटियाल, आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग तथा वर्तमान में कुलपति, केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल) के कुशल निर्देशन में राजनीति विज्ञान में सन् 1999 में डी0 फिल0 की उपाधि प्राप्त की। विभिन्न राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत। इसके अलावा विभिन्न ब्लाॅग, पोर्टल, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकों में छः दर्जन से अधिक शोध लेख/लेख प्रकाशन के अलावा तीन पुस्तकें ‘हिन्दी गढ़वाली काव्य संग्रह’, ‘उत्तराखण्डः विकास और आपदायें’  एवं ‘मध्य हिमालय: पर्यावरण, विकास एवं चुनौतियां’  प्रकाशित हो चुकी हैं। भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद् (IPSA) एवं यूनाइटेड प्रोफेसनल एण्ड स्कालर फार एक्शन (UPSA) के आजीवन सदस्य हैं। 2018 के भारत ज्योति पुरस्कार तथा 2020 में लाइफ टाइम गोल्डन एचीपमेन्ट अवार्ड से सम्मानित किये गये हैं। वर्तमान समय में राजनीति विज्ञान विभाग, अनुसूया प्रसाद बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभाग प्रभारी के पद पर कार्यरत।

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