विदेशी भावना और कोरोना – आनंदश्री

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निराशा, उदास और नकारात्मक भावना को छू मंतर करें- आनंदश्री

– विदेशी भावनाओ से दूर रहो, आप जो हो वह बनो
– लोग क्या कहते या सोचते है यह महत्वपूर्ण नही बल्कि आप क्या सोचते हो यह अधिक महत्वपूर्ण है

कुछ कारण वश आजमगढ़ के लाल बिहारी को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया था और फिर खुद को जिंदा साबित करने में वो इतने पापड़ बेल चुके थे कि अब उन्होंने खुद ही अपना उपनाम ‘मृतक’ रख लिया है। यह उनका संघर्ष था। उनका जीवन निराशा, उदास और नकारात्मक भावना से गुजरने लगा और 18 वर्ष बाद उन्हें जिंदा घोषित किया गया।
इसके बाद वह आम इंसान नही राह गए, GI नोबेल पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया। आज वह अपने गांव में स्कूल चलाते है और लोगो को कानूनी सलाह भी देते है।

निराशा, उदास और नकारात्मक भावना
यह सभी विदेशी भावना है। आपका असली स्वरूप आनंद है, शांति है, प्रेम है और धन्यवाद कृतज्ञता है।
न जाने क्यों अपने स्वभाव को भूल कर विदेशी (निराशा, उदास और नकारात्मक भावना) स्वभाव को अपना मान बैठता है। ठीक है कभी कभार विदेश घूमने चले गए, लेकिन अपना घर, देश तो मत भूलो। आपका स्वभाव तो मत भूलो। जानो आप कौन हो। आपका असली स्वभाव।

जब भी आप विदेशी भावनाओ के गिरफ्त में जाये तो –
जल्दी से बाहर आ जाये।
अपने मित्रों से बात करें
पुरानी तस्वीर या अल्बम देखें।
बुजुर्गों से बात करें
कुछ नया करें।
कुछ सीखे या लिखे।
बच्चों के साथ, मित्रो के साथ तथा परिवार के साथ समय बिताये।
अपने रोज़मर्रा कामो में आनंद तलाश करें।
अच्छी नींद लें।
जाने दो का ध्यान करें।
माफी मांगे माफ करें।
संगीत सुने, स्वयम का कोई संगीत बनाये।
आनंदश्री का लेख पढ़ें।
किताब पढ़े।
घर से बाहर टहल कर आये। ( लेकिन सरकारी नियम का पालन के साथ)
अपने आप को, किसी अपने को पत्र लिखे।
अच्छी वेबसिरिज या यूट्यूब देखें।
व्यायाम करें और गहरी सांस का अभ्यास करें।
अध्यात्म से जुड़े कोई गतिविधि कीजिये।
धन्यवाद का नोट्स लिखिए।

और भी कई एक्टिविटी आप अपने इमोशनल को सकारात्मक करने के लिए कर सकते है।
अपने स्वभाव को प्रेम, आनंद, शांति और कृतज्ञता से भर दे।

प्रो डॉ दिनेश गुप्ता- आनंदश्री
आध्यात्मिक व्याख्याता एवं माइन्डसेट गुरु
मुम्बई
8007179747

Prof Dr. Dinesh Gupta - Aanand shree Limca book of records holder Gold medalist Engineer Author, Mindset Guru

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