वृत्तचित्र ‘A serian love story’: एक नज़र

वृत्तचित्र ‘A serian love story’ जिसे सीन मैक एलिस्टर ने निर्देशित किया है। सीन 2011 से 2015 तक पांच वर्ष एक सीरियाई शरणार्थी परिवार के साथ बिताते हैं और उनके जीवन को एक वृतचित्र के माध्यम से दिखाते हैं। इसमें कोई अभिनेता नही, अभिनय नही यह हम-आप जैसे मानवों के दुखदर्द और आतंकवाद की विभीषिका से ग्रसित परिवार के दृश्य हैं। इसमें हम मुख्य रूप से आमेर, रगदा और उनके तीन बच्चों- शादी, काका और बॉब को देखते हैं।

एक ऐसा परिवार जो पहले अपने देश-हित के लिए क्रांति में सहयोग करता है, किन्तु संघर्षमय परिस्थितियों में परिवार, जीवन और भविष्य की सुरक्षा व हित हेतु सजग होकर विस्थापन का मार्ग चुनता है। अपने देश को छोड़ने की विवशता और पीड़ा उनके आपसी संबंधों को भी दुर्भाग्य से उतना ही आन्दोलित करती है जितनी की उथल-पुथल उनके जीवन में है। एक सम्पन्न सी जीवनशैली के नष्ट हो जाने के पश्चात शरणार्थी बनकर दर-दर भटकने की त्रासदी से गुजरता हुआ यह परिवार हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि ऐसा क्यों, किसलिए किसी को जीवन जीने के अधिकार से वंचित किया गया है? सत्ता और शक्ति का मद कैसे अच्छे-भले नागरिकों को जहन्नुम का तोहफा दे सकता है।

एक नन्हा सा बच्चा है जो काल-प्रवाह से प्रभावित हो क्रांति और प्रदर्शन की बात करता है। अपने माँ के जेल जाने पर प्रतिक्रिया देता है तथा साथ ही अपने माता-पिता के आपसी संबंधों पर चर्चा करता है, जब उन्हें आपस के प्रेम है तब भी और जब उसके पिता की अन्य महिला से दोस्ती है तब भी। फ्रांस निवास के दौरान वह स्वयं को फ्रेंच बताते हुए कत्तई संकोच नही करता, इससे हम यह समझ सकते हैं की बाल-सुलभता कितनी सरलता से नई परिस्थितियों में ढलने में सक्षम होती है।

उनका दूसरा पुत्र जो किशोर है वह बहुत ही स्पष्ट रूप से क्रांति और देश के नायक को नापसंद करता है कारण यह कि उसका परिवार, उसकी शिक्षा और उसका भविष्य इस क्रांति के कारण ही संकट में है।

उनका युवा पुत्र है जो क्रांति की भयावह तस्वीरों से अच्छी तरह वाकिफ है; तथा अधिकांशतः उन लोगो को याद करता है जो आतंकवाद की भेंट चढ़ गए। इसमें उसके तमाम मित्र और एक खास लड़की जिसे वह पसंद भी करता था, मारे जाते हैं।

आमेर और रगदा इस वृतचित्र के नायक-नायिका हैं।

पोषम पा की पॉडकास्ट जो मैंने डॉक्यूमेंट्री देखने से पहले ही पूरी सुनी थी और सुनकर रगदा की छवि मन में आम बुर्कानशीं अरबी महिला जैसी ही बनी थी, जो डॉक्यूमेंट्री में बिल्कुल विपरीत निकली। वह किसी यूरोपियन महिला सी वेशभूषा में रहती है साथ ही सिगरेट और शराब का सेवन पूरे परिवार के साथ सहज रूप से करती है।
रगदा का व्यक्तित्व थोड़ा जटिल है। हम देखते हैं कि एक तरफ वह इंकलाब की खातिर जेल जाती है, वहीं दूसरी तरफ अपने बच्चे के ऊपर ढेर सारी ममता लुटाती हुई भी दिखती है। वह आमेर के प्यार के लाखों दावे सुनकर भी संतुष्ट नही दिखती जैसा कि आगे आमेर की महिला मित्र के बारे में जानने के बाद शायद हमें समझ में आता भी है। वह कहती भी है कि हमारे पास अभी प्यार के नाम पर मात्र उसका जीवाश्म है। रगदा प्रेम के नाम पर आमेर द्वारा किये नियंत्रण के विरुद्ध है। वर्तमान जीवन की विफलता, सतत संघर्ष व मानसिक तनाव और द्वंद के बीच वह आत्महत्या करने की कोशिश भी करती है। अपनी उदासी और अवसाद का एकमात्र कारण वह आमेर को ठहराती है और कहती है कि परिस्थिति जन्य देश कारक तथ्य तो द्वितीयक हैं, किन्तु आमेर का व्यवहार उसे ज्यादा व्यथित करता है। अंततः टर्की में बसने के पश्चात हम उसके चेहरे पर एक संतुष्टि परक मुस्कान देखते हैं जब उसके बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित हो जाती है और वह स्वयं भी एक अच्छी जॉब करने लगती है।
वह एक सशक्त नारी का उदाहरण है जिसमें प्रेम, वात्सल्य, ममता के साथ आशा, राष्ट्रीयता और क्रांतिकारी कौशल भी हैं।

आमेर एक सादा व्यक्तित्व का मालिक है जो परिस्थितियों के संग बहने का आदी है। पहले तो वह देश में क्रांति और संघर्ष का समर्थन करता हुआ दिखता है किन्तु शनैः शनैः अपने विचारों में परिवर्तन लाता हुआ अंत में परिवार और जान-माल की सुरक्षा व भविष्य के प्रति सचेत होता हुआ तथा उसे सर्वोपरि मानता हुआ दिखता है।

सबसे छोटे बच्चे के लंबे बालों से उसके लड़की होने का भ्रम मुझे तब तक होता रहा जब तक वह मुझे छोटे बालों में नही दिख गया। इससे अपने देश के मुण्डन प्रथा की ओर मेरा ध्यान गया था। एक और बात जिसने मेरा ध्यान खींचा वह है सामूहिक रूप से चिलम पीना, जो शायद भारत में लुप्त हो चुकी है। यह डॉक्यूमेंट्री यूट्यूब पर उपलब्ध है।

अध्यापन में हूँ। माँ हूँ। बौद्धिकता मानसिक खुराक है।

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