समाचार या डरावनी फिल्म

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मेरा मानना तो यह है की समाचारों का उद्देश्य जहां तक देश, विदेश की सूचनाएं देना है , वहीं महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज को साकारात्मक संदेश देना तथा जागरूकता फैलाना भी होता है ।

हमेशा एक डर का माहौल बना देना एक अच्छे समाचार बताने वाले का काम नहीं हो सकता ।

समाचार यानि सूचनाऐं देना ।

 आजकल के समाचार बस डराते हैं।

 एक डर का माहौल हमेशा तैयार करके रखते हैं आजकल के समाचार…..

 डर जैसे की कोई डरावनी फिल्म चल रही हो अब इसके आगे क्या होगा ……. समाचारों को इस तरह परोसा जाता है जैसे 240 वालट का झटका  समाचारों का काम  हमारे समाज में देश में, विदेश में क्या कुछ विशेष हो रहा है उन सब से हमें अवगत कराना होता है।  …नाकारात्मकता फैलाना नहीं……  बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य  यह सूचनाऐं एकत्र करना उन्हें लिपीबध कर सूनाना एक अच्छे समाचार वक्ता का कर्तव्य है की अगर समाज में कुछ हिंसक , नाकारात्मक भी घटित हो रहा है ,तो भी उसे साकारात्मक ढंग से परोसना ,ना की उसे बार बार इस तरह सुनाना की जिससे हिंसा भड़के । जागरूकता के संग समाचारों को सभ्य ढंग से समाज के समक्ष पेश करना एक अच्छे समाचार देने वाले का कर्तव्य होता है ।    लेकिन आज कल समाचार सूचनाओं के साथ एक डर का माहौल तैयार कर देते हैं

 डर एक हद तक डर भी जरुरी है सतर्कता के लिए लेकिन डर जो सतर्कता के लिए , किन्तु संग में समाधान के लिए प्रेरणा भी होनी चाहिए ।

जीवन को सार्थक बनाना था उद्देश्य होना भी अति आवश्यक था ,ज्ञान वर्धक ,प्रेरणादायक पड़ने और उन्हें आत्मसात करने का शौंक रहा जो आज भी सक्रय है। कुछ ऐसा करना था जो सबके भले के लिए हो ,लिखना प्रारम्भ किया ,आज इन्टरनेट पर मेरा ब्लॉग है जिसका शीर्षक "ऊंचाईयां शीर्ष आसमानी फ़रिश्ते blogpost jo की साहित्य को समर्पित है। Iblogger ने मुझे आगे बड़ने का मौका दिया ब्लॉग of the week ,best blogger ka प्रमाण पत्र किसी विशिष्ट उपलब्धि से कम नहीं है।मेरे हौसलों को उड़ान मिली तब से अब तक लेखन करू चल रहा है ,यूं तो मैं कई साइड पर पोस्ट लिखती रहती हूं ,लेकिन I blogger ka plateform विश्वसनीय है । कई साझा संकलन भी प्रकाशित हुए हैं । जिनमें ,काव्य प्रभा, अनुभूति काव्य संग्रह ,दिल कहता है ,इतिवृत, कालजयी, नारी तुम अपराजिता आदि शामिल है ।

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