Wednesday, October 28, 2020
prachi

AmitPandey

लिखने की आदत सोचने को प्रेरित करता है और दिल के से जख्म कागजों पर शब्दों में उतर जाती है
5 Posts
1 Comments

कष्टन से दो चार

कस्टन से हुए दो चार अब पछताय काहे जे करै सामना ते ही पावै निजात सुख में पराए भी आपन होवे दुख सच्चा साथी सबकर ही पहचान...

सोच

  सोच सोचके जी घबराए फिर भी कुछ समझ ना पाए सोच से हर राह आसान हो जाए सोच से सूझ - बुझ बढ़ जाए सोच सोचके जी घबराए सोच...

जीवन

मनुष्य का निर्माण प्रकृति से ही होता है प्रकृति से ही संसार कि सभी प्रकार के जीव जंतुओं का जीवन चक्र चलता है एक...

नहीं करते

राहों से ठोकर कभी हटा नहीं करते। हाथो में लकीरों के होने से किस्मत कभी बना नहीं करते। सुबह होने से अंधेरा कभी हटा नहीं करते। चांदनी...

चारो तरफ क्यूं शोर है

चारों तरफ क्यूं शोर है जब मैं खामोश हूं शिकायतों की झड़ी से क्यूं छाई है जब कोई गिला ही नहीं अजनबी सी ये जिंदगी बनी हुई...