Saturday, October 31, 2020
prachi

Author Dinesh Prajapat

गांव-मूली, जालोर (राज)
मो.नं. 7231051900
16 Posts
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तृष्णा

मृत्यु के कगार पर बैठे हैं वे फिर भी तृष्णा के तीर लगाए बैठे हैं वे अनैतिकता की झोली भर कर वे चल रहे हैं किस राह...

अन्नदाता

चलो आज हम  एक बात करते हैं अन्नदाता को फिर याद करते हैं, आज हम उनकी भी सुनते हैं चलो उस  किसान की बात रखते हैं ...

दुःखी नेत्र

दुखी यह नेत्र मेरे दुखों का सागर लिए, हृदय में, बस यह नैन किसी अपने के धोखे को, भोहौं में छुपा कर दुखों के दर्द को, बयां करते यह नैन झूठे...

वर्तमान यथार्थ

उजड़ी राहों पर चल रहा हूं, आदत नहीं है पर आदत-सी हो गई। दुनिया के झूठे मायाजाल में, बैठा हूं बंद उसी के राज में। दुगलेपन की हद...

प्रकृति की परिवर्तनशीलता

इस नश्वरवादी जगत में प्रकृति की परिवर्तनशीलता के आगे हम शुन्य मात्र है, इसलिए जो हमारे सामने आज विद्यमान है, वोकल हो सकता है...

फिर इंसान केसै?

लोभ, लालच, ईष्यों से परिपूर्ण यह इंसान, फिर इंसान केसै? पारिवारिक दायित्वों से गिरता यह इंसान, फिर इंसान केसै? निजहित स्वार्थ तले दबता यह इंसान, फिर इंसान केसै? निमित्त उद्देश्य...

ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सालयों की दयनीय स्थिति

आज हम अत्यंत ही उत्कर्ष वातावरण में जीवन यापन कर रहे हैं, परन्तु हम कई-कई क्षेत्रों में अत्यंत ही पिछड़ गए है, या पिछड़े...

श्याम तुम्हारा कदम्ब उपवन है सुहाना

श्याम तुम्हारा कदम्ब उपवन है सुहाना राधिका के संग कब तुम आओगे श्यामा गोपियों के संग नीश्चल प्रेम कब दिखाओगे मोरे सजना श्यामा तुम्हारा कदम्ब उपवन है...

प्रेरणादायक उद्धरण

कोशिश- कोशिशों का मंजर तब थम जाता है, जब क्षमता हार जाती हैं,कला नहीं।। एक सबक- आपमें भी एक प्रेरणा है,बस उसे जगाने, पहचानने और प्रर्दशित करने...

कान्हा आये मथुरा से

कान्हा आए मथुरा से ‌मिलन की आस गोपियों से ‌चले जहां वहां ऋतुराज फले ‌सुन बांसुरी सभी के मन डोले ‌कान्हा आए मथुरा से ‌निश्छल प्रीत जगाने कान्हा चले ‌मन...