Saturday, October 31, 2020
prachi

Geeta Singh

जन्मतिथि - 15.08.1976 जन्म स्थल - नरसेना (उत्तर प्रदेश) निवास स्थल - खुर्जा (उत्तर प्रदेश) शिक्षा - एम०ए० (हिंदी अंग्रेजी) , बी०एड० , टी०ई०टी , सी०टी०ई०टी संप्रति - अध्यापन (निजी संस्था में) हिंदी भाषा से अतिशय प्रेम है। मन के अनुभवों को व्यक्त करने के लिए मैंने एक ब्लॉग बनाया है। ब्लॉग - http://geetusingh.blogspot.com लेखन विद्या - कहानी , लघु कथा , आलेख , कविता , गीत , मुझे जून माह में Top Author Of the Month से सम्मानित किया गया है, और अगस्त माह में Top Author Of the Month के लिए चयनित किया गया है, यह मेरे लिए गौरव की बात है। मेरे लेख कई समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं, जिसके लिए मैं आभारी हूं। साहित्य की सेवा करना ही एक लेखक का परम धर्म है। ईमेल - geetasinghks@gmail.com
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पहाड़ाँ वाली मैया

बीच पहाड़ाँ भवन है मां का। पावन पर्वत पर जइयो।। वहां देवी माता आएंगी। तू देखता रहियो। जब देवी माता आएं तो तू भी जोत जला देना, सब मनोकामना पूरी...

गांधीजी के तीन बंदर

गांधीजी के तीन बंदर। सत्य पथ पर चलना सिखलाते । पहला कहता ,बुरा न देखो। बुरा दिखा तो ,क्रोध बढ़ेगा। क्रोध से ,हिंसा पनप उठेगी। इसीलिए वे शांति मार्ग...

समय बड़ा बलवान

समय सबसे ज्यादा शक्तिशाली है। क्योंकि समय को तो भगवान कृष्ण ने भी सबसे ऊपर रखा है ।समय का उपयोग जिसने भी कर लिया...

मेरी प्यारी हिंदी

मेरी प्यारी हिंदी। जग से न्यारी हिंदी।। सब भाषाओं की जननी है। सब भाषाओं से पहली है। मातृभाषा है यह हमारी। सबको उन्नत करती, मेरी प्यारी हिंदी। प्यारी प्यारी प्यारी। राज दुलारी...

हो गई धन्य धन्य

geeta जीवन में ऐसे आए कान्हा, हो गई धन्य धन्य मेरे मन में ऐसे छाए कान्हा, हो गई धन्य धन्य बाल छवि तुमरी ,अति सोनी, लागी मेरे मन को, पलना में...

जीवन एक मंच

जीवन इक मंच है ,इस दुनिया का। जिसका हर किरदार ,निराला है।। जब गैर भी ,अपने हो जाते। अपनों में गैर ,बन जाता है।। हंसमुख चेहरा है, लिए...

इक पंछी बन जाऊं

चाह यही ,इक पंछी बन जाऊं, और पिंजरे को, खोल के उड़ जाऊं। खुले आसमां, देखूं दुनिया, डाल डाल पर झूम जाऊं। कैद हो पिंजरे में ,मायूसी आये...

श्राद्ध पक्ष के कौवे

श्राद्ध पक्ष के ,जब दिन आते, कौवे को मेहमान बनाते। समय समय की बात है, कभी प्यार ,कभी दूर भगाते। वक्त रहा कभी ,नहीं एक सा, वे मानव कभी...

हम रहें या ना, याद रहें हम

वक्त से मिला, यह हमें सबक, हम रहेें या ना, याद रहें हम। वक्त की कलम से, मन के भाव को, कागज पर लेकर, उतार दें हम। हम...

प्रथम शिक्षिका मां

प्रथम शिक्षिका मां ही होती, हाथ पकड़ कर, मुझे चलाती। और सत्य की ,राह दिखाती, अच्छे बुरे का ,ज्ञान कराती। क्या करना है ,क्या नहीं करना, यह सब ,अच्छे...