Wednesday, October 28, 2020
prachi

Nawab Manzoor

मैं मो. मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर। जन्म 01 मार्च, 1978 को बिहार के छपरा, सारण मे हुआ है। वर्तमान में राजकीय मध्य विद्यालय, भलुआ शंकरडीह, तरैया, सारण में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत। पिता राहत हुसैन और माता स्व.अनवरी बेगम। एम.ए., एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त और बेसिक शिक्षक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। आप मुझसे फोन द्वारा 9430011043, 7979928713 और ई-मेल mzr1978@gmail.com पर संपर्क कर सकते है। आपको मेरी कविताएं अच्छी लगी हैं तो पिछले दिनों प्रकाशित मेरा काव्य संग्रह पढ़ सकते हैं-

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प्रेम ( मंजूर के दोहे )

प्रेम **** ( दोहा ) ******* १) प्रेम की बंसी सुमधुर,मंत्रमुग्ध करी जाए। सुध-बुध का न पता चले,एकांत समय बिताए।। २) जीवन में प्रेम महान, कुछ न इसके समान। मान सम्मान जहां मिले,वही...

हंसना न छोड़

सफलता हेतु हंसना जरूरी है *********************** कठिन परिश्रम से तू ना मुंह मोड़, हंसना भी न छोड़ तू बंदे, हंसना भी ना छोड़। मेहनत करो जी तोड़,बंद राहों...

हिन्दी

हिन्दी **** भारत की शान है हिन्दी भारत की पहचान है हिन्दी। संस्कृत की संतान हैं हिन्दी , हमारी संस्कृति की शान है हिन्दी। भारत के भाल की है बिन्दी, हम...

बेबाक रघुवंश बाबू!

बेबाक रघुवंश बाबू! *************** पंचतत्व में विलीन हुए रघुवंश बाबू, राजनीति में चलता था उनका जादू। बेबाक थे ,बेबाक रहे, जो जी में आया वही कहे। अपने देसी अंदाज के...

पिता होते हैं महान

पिता होते हैं महान *************** पिता जी आप महान, हम आपकी संतान । हम-सब के हैं अभिमान, नित्य गाएं आपका ही गुणगान। आपके कंधों पर बैठकर जाने दुनिया जहान, मिली आप...

दुस्साहस !

दुस्साहस! ******* भय से भी भयभीत नहीं हो रहे हैं हम, लाख चेतावनियों के बाद भी- कान में तेल डाल, सो रहे हैं हम। दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा...

मंजूर के दोहे

मंजूर के दोहे ********** 1. शूल समान तू तेज हो, भेदो हरेक बाधा पहुंचोगे तुम शीर्ष पर, लक्ष्य कठिन नहिं ज्यादा 2. पथिक तू चलते चला जा, लक्ष्य दूर न...

गरीबी ने बचाई लाखों की जान!

b गरीबी ने बचाई लाखों की जान ! ************************** गरीबी ने गरीबों को बचाया? इसी ने कोरोना को है हराया। यह मैं नहीं विशेषज्ञ कह रहे हैं, गरीब देशों में...

व्यवहार में सुधार जरूरी बा ! ( भोजपुरी भाषा में )

व्यवहार में सुधार जरूरी बा! ********************** ( भोजपुरी भाषा में) *************** पहिर के हमरे झमकावेलू, आ# हमरे के आंख देखावेलू। कमरिया लचकावेलू, अंखियां मटकावेलू। रही रही धमकावेलू, जान के महटियावेलू। पुकरलो पर ना आवेलू, सुन...

जन करीं लापरवाही ! ( भोजपुरी भाषा में )

जन करीं लापरवाही ! ***************** ( भोजपुरी भाषा में ) ***************** ए भाई ! कोरोना बावे कि गईल? बाजार में भीड़ देख के लागता- कुछु नइखे भईल । सभे लोग बा ढीठ...