कहमुकरी

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मंच को प्रणाम🙏🏻

विषय गर्मी

विधा कहमुकरी

दिनांक 17/05/2021

 

.एक प्रयास कहमुकरी

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1. लाए अपने साथ शाम सुहानी,

मेरे सपनो में कहानी ।

छांछ, आम और ठंडी लस्सी,

ऐ सखि साजन ? ना सखि गर्मी।

 

2.  वह आए जब भी बहुत सताए,

ठंडी, शीतल छांव है भाए।

शाम ढले मन नहीं बरते नर्मी,

ऐ सखि साजन ?  ना सखि गर्मी।

 

3.  दिन में घर के अंदर भाता,

शाम को घर से बाहर भाता।

हमें पिलाता ठंडी कॉफी,

ऐ सखि साजन? ना सखि गर्मी।

 

धन्यवाद

डॉ वंदना खंडूरी

देहरादून उत्तराखण्ड

मैं डा. वन्दना खण्डूड़ी, देहरादून, उत्तराखंड से हूँ। मै बायलोजी की प्रवक्ता हूँ, मेरा साहित्य की ओर रुझान है। मुझे कविता ,कहानी तथा अनेक प्रकार की रचनाओं को सीखना अच्छा लगता है, खासकर मेरा रुझान साकारात्मकता की ओर होता हैं। नाकारात्मकता से मुझे परहेज है।

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