छोड़ दो अंचल

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छोड़ दो अंचल कि शाम हो चली,

दिल हैं बेचैन की शाम हो चली,

कब आएगा ये पल सुहाना शाम जो चली,

हम हाथ पकड़े वो हाथ बचाये क्योंकि शाम हो चली,

ना हम तुम्हे सताये क्यूंकि शाम हो चली,

बार बार घर जाए कि शाम हो चली,

न घर की याद आये कि शाम हो चली,

अभी दिल भरा नही की शाम हो चली।

prachi
नाम-अभिनव कुमार सैनी। पता-510 राधिका विहार मांढी चौराया 1,मथुरा। शिक्षा-म.बी.ए मैं शायर ए अभी कहानी लेखन और शायरी लिखता हूँ।मैने यह सब खुद ही सीखा हैं।मुझे शायरी,पोयम्स, कहानी लिखना अच्छा लगता हैं।साहित्य पब्लिकेशन ने मुझे ये मौका दिया ह की मैं डिजिटल पोर्टल पर अपनी शायरी शेयर कर पाउ, उम्मीद हैं आप सबको मेरी रचनाओं में एक शायर का एहसास होगा।

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