कीमती वही जो मुल्यवान है

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राम सिंह:-  यह महानगर है, बड़े -बडे लोग रहते हैं यहां बहुत पैसे वाले यह लोग जमीन पर पैर नहीं रखते, लम्बी लम्बी गाड़ियों में घूमते हैं। और मौका मिले तो हवाई जहाज में बैठ कर आसमान की ऊंचाइयां भी नापते हैं।

शामू :- अच्छा बड़े -बडे लोग बड़ी बड़ी बातें कितने एश ओ आराम हैं, वाह जिंदगी हो तो ऐसी हो।और यह बड़े-बड़े लोहे के सिलेंडर यह किस लिए हैं शामसिंह।

राम सिंह :- शाम सिंह तुम जहां हो ठीक हो (दूर के ढोल सुहाने ) समझ लो।

शाम सिह:- नहीं फिर भी जीते तो शहर वाले हैं, हम गांव वाले दिन भर काम ही काम…..

रामसिंह :-  काम करते हो अच्छी बात है तुम्हारा व्यायाम हो जाता है, शहर वाले तो पैसे खर्च करते हैं व्यापाम के लिए भी, शहर में तो हर चीज बिकती है, हवा, पानी, सांसें आदि -आदि जो गांवों में बेमोल हैं इनकी कद्र करो, जीवन रहते मेरे अपनों …

शामसिंह :- क्या वहां सांसें भी बिकती है ?

राम सिंह :- बिल्कुल सही प्रश्न किया तुमने . आजकल शहरों में एक महामारी फैली हुई हैं, अगर यह बिमारी शरीर में अन्दर तक फैल जाती है तो उस व्यक्ति के फेफड़ों को खराब कर देती है और उस इंसान को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है उसका दम घुटने लगता है, और कभी कभी तो मृत्यु भी हो जाती है।

किसी किसी को तो डाक्टर की परामर्श से आक्सीजन वही प्राण वायु जो जो गांवों में मुफ्त में पेड़ पौधों से मिल जाती है, सांस लेने के लिए वह हवा उन्हें पैसे देकर खरीद नी पड़ रही है।

शाम सिंह :-  ओहो!  अच्छा वो लम्बे लम्बे लोहे के सिलेंडर उनमें आक्सीजन है, यानि इंसान के सांसों के लिए हवा ….

कैसा समय आ गया है, प्रकृति ने मनुष्यों के जीने के लिए सब व्यवस्था की है, लेकिन मनुष्यों ने बिना सोचे समझे प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया, आज स्थिति ऐसी कर दी की अपनी सांसों के लिए भी हवा नहीं बची, वो भी खरीदनी पड़ रही है।

रामसिंह :- शहर वालों का रुपया पैसा सब धरा के धरा रह जाएगा आज वो दुनिया की मंहगी सी महंगी चीजें खरीद सकते हैं, किन्तु क्या फायदा, जब सांसें ही नहीं रहेगी तो सब पैसा यहीं पड़  रह जाएगा।

दो महंगे से महंगा सौदा भी आपकी सांसें नहीं लौटा सकता।

जीते जी ज़िन्दगी की कद्र करो मेरे अपनों गयी ज़िन्दगी और गया वक्त फिर लौटकर नहीं आता।

जीवन को सार्थक बनाना था उद्देश्य होना भी अति आवश्यक था ,ज्ञान वर्धक ,प्रेरणादायक पड़ने और उन्हें आत्मसात करने का शौंक रहा जो आज भी सक्रय है। कुछ ऐसा करना था जो सबके भले के लिए हो ,लिखना प्रारम्भ किया ,आज इन्टरनेट पर मेरा ब्लॉग है जिसका शीर्षक "ऊंचाईयां शीर्ष आसमानी फ़रिश्ते blogpost jo की साहित्य को समर्पित है। Iblogger ने मुझे आगे बड़ने का मौका दिया ब्लॉग of the week ,best blogger ka प्रमाण पत्र किसी विशिष्ट उपलब्धि से कम नहीं है।मेरे हौसलों को उड़ान मिली तब से अब तक लेखन करू चल रहा है ,यूं तो मैं कई साइड पर पोस्ट लिखती रहती हूं ,लेकिन I blogger ka plateform विश्वसनीय है । कई साझा संकलन भी प्रकाशित हुए हैं । जिनमें ,काव्य प्रभा, अनुभूति काव्य संग्रह ,दिल कहता है ,इतिवृत, कालजयी, नारी तुम अपराजिता आदि शामिल है ।

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