ज़रूरी तो नहीं

ज़रूरी तो नहीं
दिल हर किसी पर आये,
अपनी हर बात बताए ।
जुबां हर पल कुछ कहना चाहे,
ख़ामोशी भी तो उसे रास आये ।
क़दम बढ़ते ही जाएं,
कुछ पल वो भी विराम चाहें ।
हम जिसे चाहे वो हमें मिल जाए,
चाहें वो हमें बहुत याद आए।
सबको सब कुछ समझ आ जाए,
हम भी क्यों सब समझाएं ।
हम ख़ुशी के तराने ही गाएं ,
क्यों ना गमों की महफ़िल सजाएं ।
हर पल समझदार बन कर दिखाएं ,
कभी नासमझ भी बन जाएं ।
बने सबके हाथों की कठपुतली ,
थोड़ा सा अपने लिए भी जी पाएं ।।
रचना शर्मा “राही”

prachi
विचारों के कारवां को शब्दों में ढालती "राही" शिक्षा - स्नाकोत्तर ( संस्कृत) शिक्षा स्नातक (संस्कृत) व्यवसाय - प्रवक्ता संस्कृत । गद्य पद्य व मुक्तक विधा में लेखन । पुरस्कार व सम्मान - रूबरू मंच द्वारा काव्य व कहानी विधा में "साहित्य श्री सम्मान" । प्रतिलिपि पर कहानी विधा में पाठकों की पसंद में चयन । The साहित्य द्वारा "author of the month" Award. Story mirror द्वारा "अनुभूति की उड़ान" नामक कहानी के लिए विजेताओं में चयन । Story mirror द्वारा "जवाब उस संदेश का" कहानी का विजेताओं में चयन । ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा "इंडियन अचीवर्स अवॉर्ड" । शिक्षक सेवा सम्मान व शिक्षक रत्न सम्मान । प्रत्येक वर्ष 100% परीक्षा परिणाम पुरस्कार ।

2 COMMENTS

  1. रचना जी बहुत अच्छी प्रस्तुती है ।शुभ कामनाएं ।

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