कष्टन से दो चार

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कस्टन से हुए दो चार अब पछताय काहे
जे करै सामना ते ही पावै निजात
सुख में पराए भी आपन होवे
दुख सच्चा साथी सबकर ही पहचान करावै
धैर्य संयम के पाठ विपत्ति में ही सिखावै
जब केहू ना सुने तबही सुने भगवान

prachi

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