उजास(रोशनी)

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लड़ते रहे ताउम्र जुस्तजू में उजास की

झूठी हंसी सजाते रहे लबों पर रह उदास भी

आरजू जब दम तोड़ती अक्सर फासलों से

पर चाह रही फिर भी देखने की तुझको पास से

गुजर बसर हो गई जिन्दगी फिर नई आस में

सीलन भरे आशियाने को तलाश जैसे हो फिर उजास की

डगमगाते कदमों को लय देती झलक एक उजास की

जैसे वीराने को जगमग आ गई फिर महक उजास की

चीर स्याह अंधेरे को आ गई देखो चमक उजास की

नीरज जिंदगी में अमृत रस घोलती प्यास फिर उजास की।

लेखिका, कवयित्री एवं समाजसेविका।
एक पुस्तक 'अधूरे अल्फाज' प्रकाशित हो चुकी है।

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