उनमें शामिल मैं नहीं…

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उनसे मेरा रिश्ता अब
क्या कहूँ और क्या नहीं
मेरी मंजिल वो हैं मगर
उनकी मंजिल मैं नहीं

सिर्फ एक ज़रा सी बात पर
वो यों हुए खफा मुझसे
ऐसा लगने लगा है मुझे
कि उनके काबिल मैं नहीं

रफ्ता रफ्ता वो दूर हुए
तो ज़र्रा ज़र्रा मै बिखर गई
चाहा उन्हें हर हद तक मगर
उन्हें कर पाई हासिल मैं नहीं

जब भी उनके साथ रहूँ तो
एक परायापन सा घेरे है
उनकी बातों से लगे है यूँ
जैसे उनके मुकाबिल मैं नहीं

अब तो उनकी आहट से भी
अहसास ये मुझे हो जाता है
मुझमें शामिल हैं वो हर पल
पर उनमें शामिल मैं नहीं

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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