उन्हें अपना बना लूँ मैं…

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सामने मेरे बैठ कर
पूछे वफ़ा का मतलब
उनको बताऊँ मतलब या
दिल को संभालूं मैं

समझा उन्हीं को दिल है
और दिलबर कहा उन्हें
जी चाहे मेरे खुदाया
उन्हें अपना बना लूँ मैं

गुलाबों सा है वो चेहरा
महकती सी बहार है
आ जाएं वो जो रू-ब-रू
हर रस्म भुला दूँ मैं

उनका ही प्यार है जो
ये चेहरे पर नूर है
खुशियाँ दो जहाँ की
राहों में
उनकी सजा लूँ मैं

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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