ख़यालात की ही बात है…

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हर पल मैं हूँ खोई सी
दिन रात की ही बात है
हर पल वो मुझसे अन्जाना
जज़्बात की ही बात है

बे सबब बे दम सी मैं
क्या करूँ कहाँ जाऊं मैं
जान तक देने की कोशिश
हालात की ही बात है

सब कुछ अपना देकर भी
दूर और दूर होती गयी मैं
समझे मुझे बस एक बार
इश़ारात की ही बात है

हुँ मुनस्सिर उन पर मैं
सांस उनके बिना आती नहीं
इन्तज़ार और बस इन्तज़ार
ख़यालात की ही बात है

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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