तुझे मैं खुदा कहूँ..

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मुझे बता कि अब
मैं तुझको क्या कहूँ
कहूँ तुझे मै आम इन्सा
या फिर मसीहा कहूँ

जिन्दगी के दरिया से
निकाला मुझे बचा कर के
कश्ती कहूँ तुझे मैं
या फिर हवा कहूँ

हर एक दर्द को पी गया
तू मुस्कुरा कर के
कहूँ तुझे मरहमदा मैं
या फिर दवा कहूँ

हाल-ए-दिल मुझसे पहले
आया तेरी नज़र में
दिल कहूँ तुझे अपना मै
या फिर ज़ुबाँ कहूँ

देखूँ तुझे तो राहत सी
आ जाए है दिल को
कशिश कहूँ तुझे मैं
या फिर वफा कहूँ

हर मोड़ एक तेरे भरोसे
पार किए गयी हूँ मैं
मेहबूब कहूँ तुझे मै
या फिर खुदा कहूँ

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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