तेरी अँखियाँ

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तेरी अखियाँ है मत वाली,

तेरी आँखों का काजल जैसे समंदर मे काला मोती,

हम ढूढते ह जवाब तुम्हारी जुबान मे,

और तुम करती रही इशारा अंखियो से,

तुम मस्त नयाँ मतवाली,

तुम्हारा अंखियो का वार न जाए खाली,

है नही कोई भेद इसमें की तुम हो,

नयाँ कतख्क्ष नैनो वाली।

 

नाम-अभिनव कुमार सैनी। पता-510 राधिका विहार मांढी चौराया 1,मथुरा। शिक्षा-म.बी.ए मैं शायर ए अभी कहानी लेखन और शायरी लिखता हूँ।मैने यह सब खुद ही सीखा हैं।मुझे शायरी,पोयम्स, कहानी लिखना अच्छा लगता हैं।साहित्य पब्लिकेशन ने मुझे ये मौका दिया ह की मैं डिजिटल पोर्टल पर अपनी शायरी शेयर कर पाउ, उम्मीद हैं आप सबको मेरी रचनाओं में एक शायर का एहसास होगा।

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