दिन हुए पराये

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दिन हुए पराये की ,

सपने भी नही देख पाए,

है नही कोई जिसे हम बात कर पाए,

न अपने ह जाने पेहचाने से,

न कोई जिसे बात हो अंजाने से,

न समय का ज्ञान,

न अपना कोई मन,

भूल चुके ह रिश्ते आपनने भी,

दिन हुए पराये……।

नाम-अभिनव कुमार सैनी। पता-510 राधिका विहार मांढी चौराया 1,मथुरा। शिक्षा-म.बी.ए मैं शायर ए अभी कहानी लेखन और शायरी लिखता हूँ।मैने यह सब खुद ही सीखा हैं।मुझे शायरी,पोयम्स, कहानी लिखना अच्छा लगता हैं।साहित्य पब्लिकेशन ने मुझे ये मौका दिया ह की मैं डिजिटल पोर्टल पर अपनी शायरी शेयर कर पाउ, उम्मीद हैं आप सबको मेरी रचनाओं में एक शायर का एहसास होगा।

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