मेरी शायरी

दिल चाहता है कुछ ऐसा लिखूँ

सारे जख्म भर जाए।

तुम्हें पा ना सका तो

क्या हुआ ?

बस…तुम्हारे ही प्यार

में हम मिट जाए।

2जानते ना थे….

इश्क में इतने मशहूर हो जाएंगे।

हर दीवारों और खिड़कियों में

चर्चे-आम हो जाएंगे।

जिनसे वादा किया था

दो वक्त रोटी खिलाने का,

उनके ही इश्क में हम बेरोजगार हो जाएंगे।

:कुमार किशन कीर्ति

 

मूल नाम:सोनू कुमार पाण्डेय साहित्यिक नाम:कुमार किशन कीर्ति शिक्षा:बी0ए0हिन्दी(प्रतिष्ठा) निवास:बिहार सम्प्रति:निजी विद्यालय में सहायक हिंदी अध्यापक और स्वतंत्र लेखक। उपलब्धि:हिंदी साहित्य संग्रह से'हिंदी प्रेरणा सम्मान'से सम्मानित,और storymirrar से' लिटरेचर कॉनल'सम्मान से सम्मानित और विभिन्न सर्टिफिकेट प्राप्त।इसके अलावा'मातृभाषा उन्नयन संस्था'से सर्टीफिकेट प्राप्त।'नव पल्लव मंथन'पत्रिका के संपादक से प्रशस्ति पत्र प्राप्त। Momspresso पर ब्लॉगर और खुद का personal blog भी है। 'अनुभव पत्रिका,नव पल्लव मंथन,हम सनातनी हैं, जयदीप पत्रिका और काव्य पथ पर'पत्रिकाओं में रचनात्मक कार्य। बाल पत्रिका'बाल प्रभात'और'ढूंढाड़ी बातें'तथा ऑनलाइन'अमर उजाला काव्य'में रचनात्मक कार्य। 'साहित्य तक'की यूट्यूब चैनल पर भी रचनाओं का प्रसारण किया गया है और स्थानीय रेडियो स्टेशन पर भी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है।इसके अलावा 'The साहित्य'साहित्यिक वेबपेज की साप्ताहिक top रचनाओं में दो रचनाएँ'कभी कभी सोचता हूँ' और'मेरे अल्फाज'को शामिल किया गया है।

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