मैं बेरंग हिना सी हूँ…

0
441

कैसी है ये जिंदगी
शमा हूँ बे-रोशनी कि
न जलन की है खबर
हर पल बस फ़ना सी हूँ।

सुना करती थी मैं कभी
जिन्दगी रंगों का है सिलसिला
पर मेरे लिए मैं क्या कहूँ बस बेरंग हिना सी हूँ ।।

दिल में थी आरज़ू कोई
ज़िन्दगी में आए बनकर बहार
किससे करूँ शिकवा जब मैं
औकात में बस खिज़ा सी हूँ।

नाम से हुँ मैं खिली मगर
नहीं के बराबर ज़रा सी हूँ।
गुल हूँ मैं बे रौनक सा
दरिया हो कर भी प्यासी हूँ। ।

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here