शिक़ायत बहारों से…

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इशारों से हमें बुलाया
दिल चुराया इशारों से
उनका इशारा हुआ जब से
हमें मुहब्बत इशारों से हो गयी है

आता है प्यार हमें देखकर
उनको बेकरार
प्यारे लगे हैं इस कदर कि
नफरत करारों से हो गई है

दिन हो या कि रात हो
दिखे हमें वो हर तरफ
सच तो ये कि हम पर शायद
इनायत नज़ारों की हो गयी है

जब भी पास हो मेरे तो
करे हैं तारीफ-ए-बहार
शायद इसीलिए मुझे
शिक़ायत बहारों से हो गयी है

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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