हर बात छुपा लेते हैं…

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क्या चीज़ है मुहब्बत
हम जान ही नहीं पाए
देखते ही उनको अपने
जज़्बात छुपा लेते हैं

हवा भी आए शतो लगे
छुआ हो जैसे उन्होंने हमें
मजबूर हैं इस दिल से कि
वो हालात छुपा लेते हैं

कोई भी आहट हो तो
लगे सदा आ रही हो जैसे
याद इतनी आती है कि
हर याद छुपा लेते हैं

ख्व़ाहिश है उनकी कि
हो गुफ्त़गु किसी रोज़
है बात इतनी सी कि
हर बात छुपा लेते हैं

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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