सुशांत, आखिर क्यों, सुशांत!

आत्महत्या निस्संदेह में एक जघन्य पाप है। एक आदमी जो खुद को मारता है, उसे इस दुनिया में बार-बार लौटना होगा और उसकी पीड़ा भुगतनी होगी। — श्री रामकृष्ण परमहंस…

वन्यजीवो की कठोर होती ज़िंदगी

भारत दुनिया के शीर्ष 17 मेगा-विविध देशों में से है। यह शेर, बाघ, तेंदुए और भूरे भालू जैसे बड़े शिकारियों से लेकर हाथियों और गैंडों जैसे बड़े शिकारियों तक, दुनिया…

इक ज़िंदगी और जिएँ

वैकल्पिक सोच के इस युग में, एक महत्वपूर्ण लड़ाई है जिसे हम सभी को लड़ना चाहिए - सेवानिवृत्ति के विचार के खिलाफ। एक समाज के रूप में, भारतीयों - आम…

‘बाल काव्य’ साझा संग्रह का ऑनलाइन विमोचन समारोह आयोजित

देशभर से 150 से अधिक साहित्यकारों ने ऑनलाइन विमोचन समारोह में प्रतिभाग किया विमोचन के बाद काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, दो घंटो चलती रही काव्य गोष्ठी जयपुर।…

पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ साहित्यकार डा. चन्द्रभाल सुकुमार का गज़ल संग्रह ‘आदमी अरण्यों में’ प्रकाशित

डा. चन्द्रभाल सुकुमार के अब तक दर्जनों पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं दर्जनों साझा संग्रहों में भी उनकी रचनाएं सम्मिलित की गई है पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ साहित्यकार डा. चन्द्रभाल…

विछोह की पीड़ा

पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर कभी मिल पाएँगे । इस अनूठी…

“बस अपने काम से काम रखों”

आँखो में अक्सर अपने तूफान रखों, यहाँ सिर्फ अपने काम से काम रखों, दिल से नफरतें बाहर निकाल फेंको, तुम दिल में प्यार मोहब्बत तमाम रखों, कोशिशें करते रहों आखिरी…

मेरा सारा जीवन माँ तुम

तुम मेरे जीवन के नौका की खेवनहार हो, तुम ही मेरा रब हो और जीने का आधार हो, तुम ही मेरा जग हो और तुम ही सच्चा प्यार हो, माँ…

End of content

No more pages to load