बलात्कार

एक ना भरने वाला घाव है ये है बन गया समाज का नासूर जो है। नारी तन की अस्मिता को धूल धूसरित करता ये ऐसा घाव है। कभी निर्भया तो…

वसुंधरा बनाओ – आनंदश्री

एक पेड़ और लगाओ… पेड़ लगाओ, भर पुर उगाओ इस धरती को, वसुंधरा बनाओ एक पेड़ और लगाओ…। ऊपर नीला, आसमान है इस धरती को, हरा बनाओ एक पेड़ और…

विछोह की पीड़ा

पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर कभी मिल पाएँगे । इस अनूठी…

“बस अपने काम से काम रखों”

आँखो में अक्सर अपने तूफान रखों, यहाँ सिर्फ अपने काम से काम रखों, दिल से नफरतें बाहर निकाल फेंको, तुम दिल में प्यार मोहब्बत तमाम रखों, कोशिशें करते रहों आखिरी…

मेरा सारा जीवन माँ तुम

तुम मेरे जीवन के नौका की खेवनहार हो, तुम ही मेरा रब हो और जीने का आधार हो, तुम ही मेरा जग हो और तुम ही सच्चा प्यार हो, माँ…

बस एक हमें ही खबर नहीं होती है (गज़ल) | सलिल सरोज

इस कागज़ी बदन को यकीन है बहुतदफ्न होने को दो ग़ज़ ज़मीन है बहुततुम इंसान हो,तुम चल दोगे यहाँ सेपर लाशों पर रहने वाले मकीं* हैं बहुतभरोसा तोड़ना कोई कानूनन…

जो गीत मैं अपने वतन में गुनगुनाता हूँ | सलिल सरोज

जो गीत मैं अपने वतन में गुनगुनाता हूँसरहद के पार भी वही गाता है कोईमैं बादलों के परों पे जो कहानियाँ लिखता हूँवो संदली हवा की सरसराहट में सुनाता है…

सलिल सरोज जी दो रचनाएं

जो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन काजो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन कामुझे वही झमझमाती बारिश कर दोतुमसे मिलते ही यक ब यक पूरी हो जाएमुझे वही मद…

अगर भूख कौम के रास्ते आती है | सलिल सरोज

 अगर भूख कौम के रास्ते आती हैतो रोटी का भी कोई धर्म बता दोआप धनाढ्य हैं,आप बच जाएँगेखेतिहरों का भी कोई साल नर्म बता तोदिल्ली की बाँहों में हैं सब…

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