आशिक़ी हद के पार…

0
3

अर्ज किया है…

कहती रही पलट, तभी दिल से आवाज आई कि हम तो कबसे पलटे हुए अब तू भी तो पिटारे से कुछ ऐसा उलट, कि सिसकती रूह को चैन आए, कुछ कह नहीं सकती तो तरन्नुम में ही सजा दे कुछ ऐसा कि दिल को सुकून आए, पलट कर फिर पलटने की हमारी कोई फितरत तो नहीं, अब दे संकेत कुछ ऐसा कि इस देह को भी समझ आए।।

I consider myself as a budding writer and participated in ANUBHUTI, ANAMIK, MERI ZUBAANI anthologies

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here