कह दें हम ………..

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मुद्दतों बाद मिले हो हमसे
तुमसे नयी पुरानी कह दें हम।
कितना तन्हा बीता था दिन
लम्बी रातों की कहानी कह दें हम

सोचा था कि तुमसे मिलकर
पल पल की कह कर सुन लेंगे
पर क्यों छायी ये ख़ामोशी
अजब सी हैरानी कह दें हम

कुछ बातों से लगता है ऐसा
तुम बस मेरे साथ रहो ।
पर कुछ बातों मे सूनापन
ये नजरें अन्जानी कह दें हम।

सांसों का यूँ तिल तिल रुकना
अपने साये से भी छुपना।
राहों की एक एक आहट गिनना
इन आंखों का पानी कह दें हम।

पल भर को ठहरो तुम वहां
जहाँ उम्र भर से थमे है हम
अपने दिल कि हर एक उलझन
हर एक परेशानी कह दें हम।

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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