कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

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कौन छुपके तारकों में गीत गाता!
आ गई प्रमुदित निशा
चिर-ज्योत्सना के पट लपेटे,
तारकों के मोतियों को
पीत अंचल में समेटे।
शुभ्र यह परिधान अग-जग को लुभाता
कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

चंद्रिका लुक-छुप विटप में
है उतरती शान्त भू पर,
है बहुत उद्विग्न मिलने
को धरा से आज अम्बर।
दामिनी तिरती गगन जब मुस्कराता
कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

तारिकाओं के उठे घूँघट
अधर पर हर्ष छाया,
तोड़ सारे बन्ध यौवन
मत्त अंगों में समाया।
एक तारा मस्त चलता लड़खड़ाता
कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

हर लचीली डाल पर
हैं पंक्तियाँ सुन्दर सुमन की,
गुनगुनाता कह रहा उन्मत्त
मधुकर पीर मन की।
खोल पंखुड़ी पुष्प हर रज-कण लुटाता
कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

आज धरती, नील नभ
संपृक्त होंगे संग मिलके,
एक होंगे राग इनके
एक होंगे अंग मिलके।
हो क्षितिज अनुरक्त, रत सौरभ उड़ाता
कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

सज सहज सृष्टि, रिझाना
चाहती दृढ़ भारती को,
अनगिनत ये दीप नभ के
ही जले हैं आरती को।
भर ह्रदय श्रद्धा जगत् मस्तक झुकाता
कौन छुपके तारकों में गीत गाता!

अनिल मिश्र प्रहरी।

Anil is a Post Graduate in Economics. He is also an author of three Hindi Poetry books naming-1. Prahari, 2. Rahi Chal and 3. Vande Bharat. All the books are being sold by various online retailers such as Amazon, Flipkart, Bookscamel and so on. Ebooks are also available.

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