“गौरा”

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कजरारे नैन मन भाए

पूंछ इसकी जमीन छू जाए

हट्टी कट्टी कद काठी की

निराली है मेरी गौरा,

चंचल मन, चिकना तन

मीनू को दूध पिलाए

दूर होते ही मुझसे सहम जाए

प्यारी है मेरी गौरा,

पैने सींग तलवार से भी

चाल चले मोरनी ज्यों

बतख जैसी गर्दन इसकी

दुलारी है मेरी गौरा,

गोलू को प्यार से सहलाए

भूखी हो तब रूदन मचाए

देख मुझे फिर मुंह छिपाए

शर्मीली है मेरी गौरा।” गौरा ”
कजरारे नैन मन भाए
पूंछ इसकी जमीन छू जाए
हट्टी कट्टी कद काठी की
निराली है मेरी गौरा,
चंचल मन, चिकना तन
मीनू को दूध पिलाए
दूर होते ही मुझसे सहम जाए
प्यारी है मेरी गौरा,
पैने सींग तलवार से भी
चाल चले मोरनी ज्यों
बतख जैसी गर्दन इसकी
दुलारी है मेरी गौरा,
गोलू को प्यार से सहलाए
भूखी हो तब रूदन मचाए
देख मुझे फिर मुंह छिपाए
शर्मीली है मेरी गौरा।

जन्म : 8 मई 1989 को हरियाणा के जिला भिवानी के गांव जूई खुर्द में।पति : राजेश पूनिया (महासचिव, काव्या खेल गांव संस्थान राजस्थान एवं ए.बी.वी.पी.के पूर्व जिला सहसंयोजक, चुरू)।शिक्षा : स्नातकोतर (अंग्रेजी, हिन्दी, समाजशास्त्र, लोकप्रशासन), बी.एड., ए.डी.सी.ए.।व्यवसाय : सैन्ट्रल को ऑपरेटिव बैंक जयपुर, राजस्थान में कार्यरत।खेल उपलब्धि : मार्शल आर्ट की अन्तर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता एवं पूर्व में राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य।एक पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारत पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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