तर्क लेखक और लेखनी के बीच

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लम उठाई जब लिखने के लिए,

कलम ने ही हमसे पूछ लिया,

उठा तो लिया है मुझे,

अब लिखोगे क्या मुझसे।

कुछ सोच हमने भी कह दिया,

दिल हाल बया कर रहे हैं,

मचलते  कुछ एहसासो  को,

  तेरी स्याही से जिंदा कर रहे है।

कहां कलम ने हमसे,

ये जवाब नही मेरे सवाल का,

जो लिखने उठाया है मुझे ,

वही लिख डालो मुझसे

हमने कहा कलम से,

हमराज़ बनना चाहते हो,

बन जाओ कोई गम नहीं,

पर बचाना इसे खुदगर्जों से

हाथ में लिया विश्वास से,

तो विश्वास करना होगा,

जब तक लोगे हाथ में,

एक लब्ज निकलेगा ज़ुबा से

वफादारी का दावा करते हो,

वफादार बनना होगा,

जो किया दगा तुमने,

ना होगा कोई बुरा हमसे।-2

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