तुम्हारी माँ……….

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एक ऐसी माँ जो गलत रास्तों पर भटक चुके अपने बेटे को बहुत याद करते हुए एक चिट्ठी लिखती है ………….

मैं तो माँ हुँ अपने दिल कि
कभी किसी को ना कह पाऊँगी।
लाल मेरे अब तेरे बिन
ज़्यादा दिन मैं जी ना पाऊँगी। ।

आंगन के चूल्हे पर अब भी
तेरी मनचाही साग बनाती हुँ।
आदतन तेरा तौलिया-ओ-कपड़े
तह करती रोज़ सुखाती हुँ।
मैं तो माँ हुँ आंगन में मैं
मिट्टी सी जम जाऊँगी ।
पर जो सांसें थम गयी तो
फिर धड़कन कहाँ से लाऊँगी। ।

भाई बहन का रिश्ता अब भी
भारी हर रिश्ते पर रहता है।
तेरा छोटू अब लगा बोलने
दिन भर मामा मामा कहता है। ।
मैं तो माँ हुँ तस्वीरों में भी
तेरा सर सहलाऊँगी पर।
कब तक उस छोटे बच्चे को
चन्दा से बहलाऊँगी ।।

दिन पूरे हैं बहु के उसको
अस्पताल ले जाना होगा ।
जचगी के हर कागज़ पर
नाम तेरा लिखवाना होगा। ।
मैं तो माँ हुँ अपना फ़र्ज़ मैं
रो कर थक कर भी निभाऊँगी।
पर उसका तो पहला बच्चा है
उसको क्या समझाऊँगी।।

फिर छत टूटी पिछवाड़े की
बाबा ने अकेले बनाई थी।
कल उन बेदम कान्धों को
बहुत याद तुम्हारी आयी थी। ।
मैं तो माँ हुँ बेटा मैं तो
बिन हज के भी रह जाऊँगी ।
बिन तेरे आखें बंद हुयी तो
ये मैं सह ना पाऊँगी ।।

छोटी सी ज़िन्दगी को फिर से
हम सीधा सादा कर लेंगे।
नहीं रहेंगे भूखे हम निवाला
आधा आधा कर लेंगे ।।
मैं तो माँ हुँ पानी पी कर भी
दिन रात यूँ ही रह जाऊँगी।
पर तेरी आँखों के आँसू
मैं सहन नहीं कर पाऊँगी। ।

तू नहीं यहाँ तो ये घर नहीं
अब पहले सा घर लगता है।
सरहद पर गोली की आवाजों से
अनचाहा सा डर लगता है। ।
मैं तो माँ हुँ एक दिन मैं
डर डर कर ही मर जाऊँगी।
अपनी सारी दुआ-ओ-सवाब
सब तेरे हिस्से कर जाऊँगी। ।

खून किसी का भी बहे पर
आखिर माँ का दिल ही रोता है।
कोई भी हो मरने वाला वो
एक माँ का ही बेटा होता है। ।
मैं तो माँ हुँ तेरे लिए भी
ये दर्द नहीं सह पाऊँगी ।
तेरी सांसे तेरे लिए फिर
जां देकर भी ला ना पाऊँगी। ।

उड़ते हैं जब परिन्दें नये नये
तो भटकन हो ही जाती है।
हर ठोकर के बाद ज़िन्दगी हमें
फिर से चलना सिखाती है। ।
मैं तो माँ हुँ तेरे लिए मैं
शोलों पर चल जाऊँगी ।
चुन लेंगे हम तुम राह नयी
मैं तुझे फिर से चलना सिखाऊँगी।

तुम्हारी माँ।

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

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