पहली रात

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तेरे जिस्म मै अपने जिस्म को रखु

तेरे होठं को अपने होठं से मस्लू

तुम्हे प्यार मै इतने शिद्दत से करू

की उस मीठे दर्द से तेरी आह निकल जाए

दर्द से तेरी आंखों में आसूं  धुलक जाए

और तुम तन और मन से मेरी हो जाए

बदन से मै तेरे लिपटा रहूं और  सुबह हो जाए

सुबह जब मै तुमसे पूछयू तेरे रात का।आलम

तू शर्मा कर मेरे सीने से लिपट जाए

 

कनक श्रीवास्तव

छत्तीसगढ़ भिलाई

prachi

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