मां ही तो है वह

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लाख बुराई करे वह

एक पल में भूल जाती है

उसकी हर गलती को

अंजाना कर जाती है

मां ही तो है वह

नसीहत  देती लाख समझाती है

न मानने पर कहां कुछ कर पाती है

आखिर मां ही तो है वह

कभी परवरिश पर भी सवाल होते खड़े हैं

इसकी खातिर अपने ही उस से लड़े हैं

पर चुपके से आंसू बहाती है

खुद को खुद से ही बहलाती है

आखिर मां ही तो है वह

लाख झिडके उसको वह

कहां कोई बात दिल में लगाती है

बेबसी अक्सर उसको खाई जाती है

आखिर मां ही तो है वह।

लेखिका, कवयित्री एवं समाजसेविका।
एक पुस्तक 'अधूरे अल्फाज' प्रकाशित हो चुकी है।

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