मीठा एहसास

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प्यार का मीठा एहसास दिलाने लगी हो तुम

अब तो मुझको मुखी से चुराने लगी हो तुम

तेरी चाहत का छाया है सुरूर इस कदर

हर पल हर जगह नजर आने लगा है तू

वीरान थी यह जिंदगी तेरे आने से पहले

खुशियों के सपने दिखाने लगी है तू

हर पल बस मुझे होता है तेरा एहसास

इस कदर सांसों में समाने लगी हो तुम

एक।पल।की भी दूरी सह नहि पाता हूं।मै

हो कर दूर  मुझसे क्यों आजमाने लगी हो तुम

राह चलते अक्सर होता है गुमान मुझको

की बन साया मेरे साथ चलने लगी हो तुम

नाम कोई भी लिख लूं तो नाम आए तेरे लबो पर

बन कर जादू मेरी रूह में समाने लगी हो तुम

तेरी यादों से दिल होता है कनक मेरा

घुल कर साथ लहू के नस नस में समाने लगी हो तुम

जानें कौन सा डोर है तेरी और खीच ले जाती हो तुम

मुझ को अपना दीवाना बनाने लगी हो तुम

तस्सवुर में अक्सर होता है यह महसूस मुझको

छोड़  कर यह दुनिया मेरी बाहों में समाने लगीं हो तुम

यह तो बता क्या नाम दूं इस दीवानगी का

बेचैन कर के  हर लम्हा मुझे तड़पाने लगी हो तुम

तेरे ख्यालों से महकने लगी है जिन्दगी मेरी

मेरे जेहन और दिल में इस कदर छाने लगी हो तुम

ये मासूमियत यह भोलापन यह सादगी तेरी

मुझको हर अदा से सताने लगीं हो तुम

जेठ के राहो में धूप थी हर तरफ

अपने प्यार कि बारिश से नहलाने लगी हो तुम

क्या इस बात को एहसास है श्रुति तुम्हे

मेरी हर कविता हर गजल मै आने लगी हो तुम

 

कनक श्रीवास्तव

For my love

Shruti

prachi

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