मैं हूँ तुम्हारी प्रतीक्षा में…

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एक विराम सा कुछ वाणी में
और नयनों में हो आव्हान
क्षण क्षण मिश्रित भाव लिए
मैं हूँ तुम्हारी प्रतीक्षा में ।

अनिच्छित धारा हुआ संयम
और मौन ही प्रणय निवेदन
श्वासों का उतार चढ़ाव लिए
मैं हूँ तुम्हारी प्रतीक्षा में ।

सहज सुकोमल चंचल ह्रदय
उदगारों में प्रतिपल परिवर्तन
किंचित सागर सा ठहराव लिए
मैं हूँ तुम्हारी प्रतीक्षा में ।

एक स्नेहिल सा स्वप्न निमंत्रण
और उनका वो निःशब्द अनुमोदन
ऐसे ही अनेकों प्रस्ताव लिए
मैं हूँ तुम्हारी प्रतीक्षा में

चहुँ ओर एक परिचित मौन हो
दो ह्रदय हो सब कुछ गौण हो
संकोच व प्रेम में सम्भाव लिए
मैं हूँ तुम्हारी प्रतीक्षा में ।

कवयित्री एवं लेखिका।
कई साझा पुस्तकों में सहभागिता कर चुकीं हूँ।

12 COMMENTS

    • आपने मेरे भावों और शब्दों को समझ लिया मुझे बहुत अच्छा लगा

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