योग करो

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योग करो

 

जीवन सफल बनाने को

कम से कम तुम भोग करो ।

करना ही है कुछ भाई

तो हौले हौले योग करो ।।

 

विश्व गुरु तो सदियों से

हम बने आ रहे दुनियां में ।

ज्ञान का दीपक बनकर

हम जले आ रहे दुनियां में ।

बीमारू इस दुनियां का

खत्म हर एक रोग करो ।

करना ही है कुछ भाई

तो हौले हौले योग करो ।।

 

मशीनरी के इस युग में

परम्परा को बढाया है ।

मेरे  देश के संतों ने

भारत का मान बढाया है ।

योग की महिमा मानी सबने

मिलकर सब उपयोग करो ।

करना ही है कुछ भाई

तो हौले हौले योग करो ।।

 

लक्ष्मण सिंह त्यागी रीतेश

लेखक, कवि और संपादक। मैं आज तक दर्जनों पुस्तकों का सफल संपादन कर चुका हूँ और मेरी लगभग 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं है व कुछ प्रकाशनाधीन हैं।

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