रिश्ता पुराना

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नज़र का ऊपर उठना,

सितारों की महफिल में खो जाना‌

चांद की चांदनी निर्मलता पाना,

सूर्य की तपिश में कंचन हो जाना,

सदियों से रहा होगा यहां आना-जाना

आकाश की ऊंचाइयों से अपना रिश्ता पुराना

नज़र का ऊपर उठना उसे तलाशना

अनुभव होता है शाश्वत सुख का तराना

दिल की गहराइयों में उसके होने का एहसास हो जाना

जाने क्यों विसर्मित हो जाता है धरती पर

आकर रिश्ता पुराना…

दिल में जब एक टीस सी उपजती है

धरती पर सब सुख भोगता हूं फिर भी

जाने क्यों अधूरा रहता हूं ‌

तब नजर ऊपर की ओर ही उठती है

खामोशियों में गूंजती है आवाज़ें

मेरी डोर तुझसे बंधी है ‌‌

तभी तो हर दुविधाआ में ,बेअंत सुविधा में

नज़र ऊपर की ओर उठी है

रिश्ते -नाते शिकवे -शिकायतों के संसार में फंसा हूं

हंसता हूं मुस्कुराता हूं थका हारा सा हो जाता हूं

कुछ पल विश्राम की अवस्था में जब जाता हूं

अनन्त का अथाह सुख पाता हूं ।

जीवन को सार्थक बनाना था उद्देश्य होना भी अति आवश्यक था ,ज्ञान वर्धक ,प्रेरणादायक पड़ने और उन्हें आत्मसात करने का शौंक रहा जो आज भी सक्रय है। कुछ ऐसा करना था जो सबके भले के लिए हो ,लिखना प्रारम्भ किया ,आज इन्टरनेट पर मेरा ब्लॉग है जिसका शीर्षक "ऊंचाईयां शीर्ष आसमानी फ़रिश्ते blogpost jo की साहित्य को समर्पित है। Iblogger ने मुझे आगे बड़ने का मौका दिया ब्लॉग of the week ,best blogger ka प्रमाण पत्र किसी विशिष्ट उपलब्धि से कम नहीं है।मेरे हौसलों को उड़ान मिली तब से अब तक लेखन करू चल रहा है ,यूं तो मैं कई साइड पर पोस्ट लिखती रहती हूं ,लेकिन I blogger ka plateform विश्वसनीय है । कई साझा संकलन भी प्रकाशित हुए हैं । जिनमें ,काव्य प्रभा, अनुभूति काव्य संग्रह ,दिल कहता है ,इतिवृत, कालजयी, नारी तुम अपराजिता आदि शामिल है ।

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