सच्ची झूठी बातें

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सच्ची झूठी बातें
रवि शंकर साह
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आओ हम सब सच्ची झूठी बात करें।
अपनों से अपनी दिल की बात करें।
तुम हमारी जयजयकार करना।
मैं तुम्हारी जयजयकार करूँगा।
कुछ तुम सच्ची झूठी बातें कहना।
मैं कुछ सच्ची झूठी बात कह दूँगा।
तुम मुझसे सच्चे-झूठे वादे करना ।
मैं झूठमूठ का विश्वास कर लूंगा ।
इसी तरह सच्ची झूठी बातों से,
हम सब अपना दिल बहलायेगे ।
मैं कुछ बेतुकी कविता सुनाऊँगा।
तुम मेरी वाहवाही कर देना।
तुम बेसुरा गीत सुना देना।
मैं झूठी ताली बजा दूँगा।
ऐसे ही हमदोनों दिल बहलालेंगे ।
देखने वाले देखते रहे जाएंगे
और हम कवि रवि बन जांएगे।
कहने वाले कुछ भी कहे,
रोकने वाले कितनो रोके।
हमें बढ़ना है बढ़ते रहेंगें।
किसी के रोके से नहीं रुकेगें।
©®रवि शंकर साह
बलसारा बैद्यनाथ धाम, देवघर
झारखंड (814112)

prachi

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