समय है

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समय है कविताओं

के मुखर हो जाने का

उन उन कविताओं को दे दो पंख

जो आसमां तलाश रही थी अरसे से

जो ढूंढ रही थी  अभिव्यक्ति

पहुंचा दो गंतव्य तक उनको

जो भटक रही है सदियों से

उड़ने लगे हैं जो रंग इन्द्रधनुष के

समय है भर लो कैनवस जो सूना है

समय है कविताओं के मुखर हो जाने का

निराशा के भंवर में हर मानव है

खींच लाओ आशा के गढ़ में

नव दृष्टि से सृजित कर दो

कविताएं पुकार रही।

लेखिका, कवयित्री एवं समाजसेविका।
एक पुस्तक 'अधूरे अल्फाज' प्रकाशित हो चुकी है।

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