ज़िन्दगी अक्सर मुझे कुछ  सिखाती है।

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ज़िन्दगी अक्सर मुझे कुछ  सिखाती है।

कुछ नया सा सबक वो मुझे दे जाती है।

नासूर से ज़ख़्मो को गहरा वो कर जाती है।

ये ज़िन्दगी है, कई नाच नचाती है।

अपनो से अपनो को पराया बनाती है।

कागज़ों के चंद टुकड़ो के लिए,

भाई को भाई का दुश्मन बनाती है।

ज़िन्दगी अक्सर मुझे कुछ सिखाती है।

ख़्वाबों को पूरा करने की ज़िद,

किसी को छोटा करने की चाहत,

गाँव से शहर ले आती है।

गाँव के आँगन से भी छोटे डब्बे,

में सारी उम्र  कट जाती है।

ज़िन्दगी अक्सर मुझे कुछ सिखाती है।

छोटी-छोटी सी ज़रूरतों को

पूरा करने में, संघर्ष खूब करती है।

आसमान से ज़मीन भी ये दिखती है।

ज़िन्दगी अक्सर मुझे कुछ सिखाती है।

फिर धीरे से एक छल कर जाती है।

जिस्म से रूह को ले जाती है ।

मैं यू ही देखता रह जाता हूँ।

ता उम्र की मेहनत पल में बिखर जाती है।

ज़िन्दगी अक्सर मुझे कुछ सिखाती है।

नीलोफर

prachi

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