Maanyatayein

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मान्यताएं
मान्यताओं के आगे सर झुकाना ही पड़ता है
सत्य की नींव नहीं तो तर्क की भी गुंजाइश नहीं
हम , बस अहम् पर ही रुक गए
“अहम् ब्रह्मास्मि” तक कहाँ पहुँच पाए ?
न आस थी और न विश्वास
अहम् की तो अपनी पहचान है ना !ब्रह्मा की क्या पहचान ? और क्या अस्तित्व ?
बस, मानो तो सबकुछ , वर्ना कुछ भी नहीं
मैंने कहा ना …….
मान्यताओं के आगे सर झुका लो !
तेरी हो या मेरी ..किसका अहम् ज़्यादा गहरा है ?
दुनिया इसी पे चलती है
“तुम ये तो मैं वो” की जंजाल में
ज़िन्दगी खर्च हुई जाती है
न ख़ुद सीखा, और न सीखने दिया
अंध विश्वास और बदगुमानी को कवच मान कर निकल पड़े
अनजानी मंज़िल..अँधेरे रास्ते
रौशनी से महरूम , मान्यताओं में गुम
कभी इधर तो कभी उधर…
एक तुम ही सही…बाकी सारे ग़लत
एक और मान्यता..एक आडम्बर
जिसका कोई इलाज नहीं
दोबारा कहती हूँ …जी लो अपनी ज़िन्दगी मान्यता के जाल में
कम से कम कुछ लोग तो साथ देंगे !

सुरेखा कोठारी

author of "Dharma by design: A Universe in Harmony" { available on Amazon worldwide / flipkart} a Vocalist : ghazal, geet, bhajans on you tube Hypnotherapist Writer of poems, ghazals and short stories in Hindi Writer of articles in English and Hndi Conducts talks and workshops on spiritual and self-help topics

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