आस

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आज भी ननुआ के खेत को पानी नहीं मिल सका क्योंकि ट्यूबवेल केवल एक बड़े किसान के ही पास थी । तपती चिलचिलाती जून की गर्मी में पानी की किसे आवश्यकता न होती ?बड़े किसान राजाराम के यहां छोटे किसानों की लाइन लगी हुई थी ।ननुआ के पास था केवल दो बीघा खेत जिससे साल भर का खर्च चलाता, परिवार पालता था।

“आज पानी मिल गयौ का ?”ननुआ की पत्नी मंगला ने उत्सुकता से पूछा।

“नाय” ननुआ ने उदास हो बताया।

“दस दिनन तै खेत कू पानी नाय मिलौ है, खेत सूखै जाय रयौ ऐ।” मंगला लगभग रूआंसी हो बोली।

“आज पानी नाय मिलौ तौ गेहूं नाय बच पाबेंगे।” ननुआ मंगला की ओर देखकर बोला।

दोनों खेत के पास बैठकर आकाश की ओर देखने लगे शायद उन्हें अब एक ही आस थी।।

–गीता सिंह
खुर्जा, उत्तर प्रदेश

prachi
पिता - श्री अरविंद सिंह राणा, माता - श्रीमती विमला राणा एवं पति - श्री मनोज प्रताप सिंह। शिक्षा - एम० ए० (हिंदी-अंग्रेजी), बी० एड०। सम्प्रति - लेखन एवं शिक्षण। प्रकाशित कृतियां - अनुभूति काव्य संग्रह, 'कहानियां' कहानी संकलन। प्रकाशाधीन - 'लम्हे' लघु कथा संग्रह, खामोश बचपन। सम्मान - 'द साहित्य' द्वारा जून 2020 तथा अगस्त 2020 के लिए 'टॉप ऑथर ऑफ द मंथ' से सम्मानित, के० बी० राइटर्स द्वारा सम्मान पत्र, अनुभूति 2020 अवॉर्ड। साहित्य संगम संस्थान उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा प्राप्त गजल गौरव सम्मान, फाग मधु प्रसाद सम्मान, उ०प्र० श्रेष्ठ टिप्पणी कार सम्मान, उ° प्र° श्रेष्ठ काव्य विवेचक सम्मान। शुभ संकल्प समूह द्वारा प्राप्त सम्मान पत्र। निवास स्थान- खुर्जा, उत्तर प्रदेश। ई-मेल - geetasinghks@gmail.com ब्लॉग- मन के भावों को व्यक्त करने के लिए एक ब्लॉग पेज बनाया है- 'मेरे अपने मन के बोल'। लिंक - https://geetusingh.blogspot.com

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