केन्दी हा केन्दी ना

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केन्दी हा केन्दी ना वो हमारे प्यार को,

ना समझ आता हैं बेक़रार दिल को,

हैं प्यार रुपये मैं तुला,

बिन इसके नहीं मिलता आपको कोइ राह और आसमान,

रिश्ते भी आजकल नापतोल कर बनाये जाते हैं,

दुनिया ही बेगानी हो जाती हैं,

प्यारा भी हा और ना के मोहताज़ हो जाते हैं।

prachi
नाम-अभिनव कुमार सैनी। पता-510 राधिका विहार मांढी चौराया 1,मथुरा। शिक्षा-म.बी.ए मैं शायर ए अभी कहानी लेखन और शायरी लिखता हूँ।मैने यह सब खुद ही सीखा हैं।मुझे शायरी,पोयम्स, कहानी लिखना अच्छा लगता हैं।साहित्य पब्लिकेशन ने मुझे ये मौका दिया ह की मैं डिजिटल पोर्टल पर अपनी शायरी शेयर कर पाउ, उम्मीद हैं आप सबको मेरी रचनाओं में एक शायर का एहसास होगा।

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